धनराज पिल्लई से बातचीत
पूर्व ओलंपियन और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान धनराज पिल्लई ने भारत के लिए पाकिस्तान के खिलाफ मैच जीतने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में भारत ने पाकिस्तान को नहीं हराया है और वर्तमान टीम में अनुभव है। उन्होंने टीम की फिटनेस और छोटे शहरों में खेलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता को भी बताया।

वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। पूर्व ओलंपियन और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे धनराज पिल्लई ने कहा है कि नीदरलैंड में चल रहे मौजूदा विश्व कप में भारत का अगला मैच पाकिस्तान से होना है। इस मैच को जीतना भारत के लिए जरूरी है। पिल्लई मंगलवार को यहां शिवपुर में ओलंपियन राहुल सिंह द्वार के उद्घाटन समारोह में आए थे। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि पूल मैच में भारत को यह मैच हर हाल में जीतना पड़ेगा। बताया कि पिछले 10 साल में भारतीय टीम पाकिस्तान से नहीं हारी है और उसका मोरल ऊंचा है। पाकिस्तान के खिलाफ करीब 70 मैच खेल चुके धनराज पिल्लई ने बताया कि दोनों ही टीमों के लिए मैदान पर रणनीति काम नहीं करती। रणनीति और गेम के ऊपर एक ‘वार’ का माहौल होता है। दोनों टीम के खिलाड़ियों की स्पिरिट ही मैदान पर काम करती है। हर हाल में जीतने के लिए टीमें उतरती हैं। बताया कि उनके समय की और आज की पाकिस्तान की टीम में काफी अंतर है। तब शहबाज अहमद, मंसूर अहमद, ताहिर जमान, सोहेल अब्बास, वसीम अहमद जैसे खिलाड़ी फारवर्ड ब्लॉक को मजबूत बनाते थे। उनके समय की पाकिस्तान टीम काफी मजबूत हुआ करती थी। बताया कि वर्तमान में भारत के पास कप्तान हरमनप्रीत, मनप्रीत काफी अनुभवी खिलाड़ी हैं। बीते 15 अगस्त को मेसेज पर बातचीत के दौरान उन्हें टीम को साथ लेकर चलने का मंत्र दिया। कहा कि मैदान पर उत्तेजित नहीं होना है。
टीम की फिटनेस ऑस्ट्रेलिया जैसी
उन्होंने अंतिम चरण में पहुंचने वाली टीमों में भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, जर्मनी, बेल्जियम, अर्जेंटिना का नाम लिया। साथ ही कहा कि पहले के खेल और अब के खेल में काफी अंतर है। पहले स्किल आधारित खेल होता था। अब खिलाड़ी के पास चार से पांच सेकंड तक गेंद नहीं ठहरती। काफी तेज हॉकी हो गई है। इसमें स्किल के साथ फिटनेस होना जरूरी है। बताया कि वर्तमान में भारतीय टीम की फिटनेस और स्टेमिना ऑस्ट्रेलिया की टीम की तरह है।
लीग से खिलाड़ियों को मिलेगा मंच
धनराज पिल्लई ने कहा कि छोटे शहरों के स्तर पर लीग होने चाहिए। इससे क्षेत्रीय खिलाड़ियों को मंच मिलेगा। कहा कि यूपी सरकार खेल की दिशा में बढ़िया काम कर रही है। ओलंपियन के नाम से द्वार बनवा रही है, जिससे स्थानीय खिलाड़ी प्रेरित होंगे। वाराणसी में तीन एस्ट्रोटर्फ मैदान हैं। विवेक सिंह अकादमी के लिए भी मांग की गई है।
खुद भी खिलाड़ी तैयार कर रहे
धनराज पिल्लई ने बताया कि उनकी दो अकादमी चल रही है। एक मुंबई में हॉकी की अकादमी है, जिसमें वह प्रदेश स्तर पर कैंप लगाकर प्रतिभाशाली गरीब खिलाड़ियों का चयन करते हैं। उनको खर्च भी देते हैं। उनकी अकादमी से युवराज वाल्मीकि और देवेंद्र वाल्मीकि भारतीय टीम के लिए खेले। ये ललित उपाध्याय के साथ टीम में रहे हैं। दूसरी अकादमी बेंगलुरु में है, जहां दूसरे 12 ओलंपिक खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
बनारस की मिट्टी में है हॉकी
ओलंपियन विवेक सिंह और ओलंपियन राहुल सिंह के साथ चार से पांच साल तक खेल चुके धनराज पिल्लई ने बताया कि बनारस की मिट्टी में हॉकी है। मो. शाहिद, विवेक सिंह, राहुल सिंह, ललित उपाध्याय, सुनील सेठ जैसे कई अंतरराष्ट्रीय नाम हैं।


