बैंक प्रबंधकों के साथ बैठक, म्यूल एकाउंट पर पुलिस ने बढ़ायी पहरेदारी

हिन्दुस्तान, धनबाद
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धनबाद पुलिस साइबर ठगी के खिलाफ अभियान चला रही है। पुलिस अब साइबर अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क पर नजर रख रही है और म्यूल अकाउंट्स पर कड़ी कार्रवाई कर रही है। हाल ही में बैंक प्रबंधकों के साथ बैठक में संदिग्ध खातों की पहचान और तुरंत कार्रवाई पर चर्चा की गई।

बैंक प्रबंधकों के साथ बैठक, म्यूल एकाउंट पर पुलिस ने बढ़ायी पहरेदारी

साइबर ठग और ठगी के खिलाफ धनबाद पुलिस का अभियान जारी है। साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए अब सिर्फ मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस या डिजिटल सुराग ही नहीं, बल्कि उनके पैसों के पूरे नेटवर्क पर भी धनबाद पुलिस की नजर है। साइबर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में पहुंचाने वाले म्यूल अकाउंट पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस और बैंकों के बीच समन्वय बैठक हुई, जिसमें इस तरह के खातों की पहरेदारी बढ़ाने पर बातचीत हुई। एसएसपी प्रभात कुमार के निर्देश पर चल रहे विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत गुरुवार को समाहरणालय स्थित पुलिस सभागार में शहरी क्षेत्र के सरकारी एवं निजी बैंकों के शाखा प्रबंधकों के साथ चौथे चरण की बैठक हुई।

बैठक में 82 बैंक शाखाओं के प्रबंधक शामिल हुए। ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने बैठक में साइबर ठगी के बाद पैसों के ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध बैंक खातों की पहचान और तत्काल कार्रवाई को लेकर विस्तृत चर्चा की। पुलिस ने बैंक अधिकारियों के साथ म्यूल बैंक अकाउंट, अचानक बड़े वित्तीय लेनदेन, नए खातों में असामान्य ट्रांजेक्शन और कुछ ही समय में कई खातों में रकम के ट्रांसफर जैसे पैटर्न साझा किए। ग्रामीण एसपी ने जोर दिया कि किसी खाते में संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर फौरन सूचना पुलिस को दी जाए। मौके पर डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर प्रकाश सोय, साइबर डीएसपी प्रदीप कुमार साव, धनसार थाना प्रभारी मनोहर करमाली के साथ बैंकों के अधिकारी मौजूद थे।

Ravikant Jha

लेखक के बारे में

Ravikant Jha

शॉर्ट बायो : रविकांत झा पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता फील्ड में हूं। फिलहाल ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद में चीफ रिपोर्टर की भूमिका में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं।


परिचय एवं अनुभव
रविकांत झा झारखंड के मीडिया जगत के एक जानेमाने नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 24 वर्षों से अधिक समय का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के लिए क्राइम और रेलवे बिट पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। अखबार के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के लिए भी रविकांत रोचक व पठनीय कंटेंट देते रहते हैं। इनकी झारखंड की पत्रकारिता में गहरी पैठ है।


करियर का सफर
रविकांत झा ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2002 में दैनिक जागरण धनबाद से की थी। रविकांत वर्ष 2010 तक दैनिक जागरण धनबाद के साथ रहे। जागरण में वे शिक्षा, लाइफ स्टाइल एंड एंटरटेनमेंट के साथ रेलवे और धर्म-अध्यात्म व समाज जैसों विषयों को कवर करते थे। यह वह दौर था जब कागजों और पैक्स से पत्रकारिता कंप्यूटर और ई-मेल पर शिफ्ट हो रहा था। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ धनबाद का दामन थामा। वर्ष 2010 में मीडिया जगत में न्यू मीडिया का अंकुरण हो चुका था। हिन्दुस्तान में रहते उन्होंने क्राइम और रेलवे जैसी बिट पर अपनी गहरी पहचान बनाई। न्यू मीडिया के साथ तालमेल बैठाते हुए वे प्रिंट के साथ-साथ ‘लाइव हिन्दुस्तान’ के लिए भी बेहतर सामग्री दे रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि
B.COM (एकाउंट्स) और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। कंप्यूटर में भी डिग्री कोर्स किया है। पत्रकारिता में रहते कई कानूनी कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं। पत्रकारिता की अचार संहिता की बारीकी समझ है। हिन्दुस्तान की ओर से आयोजित मोबाइल जर्नलिज्म (MoJo) की कार्यशाला में भी हिस्सा ले चुके हैं। धनबाद के साथ-साथ झारखंड के अपराध और अपराधियों के क्रोनोलॉजी से वे वाकिफ हैं।


विशेषज्ञता
क्राइम (सामान्य अपराध के साथ-साथ सीबीआई, ईडी, सीआईडी, रेल क्राइम व नक्सल गतिविधि)
रेलवे (रेलवे में ईस्टर्न जोन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि)
पैनल डिस्कशन का पेशेवर तरीके से संचालन

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