एमडीएम : लापरवाही की बढ़ती शिकायतों पर डीजीपी ने दी चेतावनी
डीजीपी ने मध्याह्न भोजन योजना में लापरवाही की बढ़ती शिकायतों को लेकर चेतावनी दी है। जनवरी से अगस्त 2026 में 33 जिलों में कीड़ों और सांपों के मामले सामने आए हैं। सहरसा में 150 से अधिक छात्र बीमार हुए हैं। उच्च न्यायालय ने इसे बच्चों की जान के लिए खतरा बताया है।

एमडीएम : लापरवाही की बढ़ती शिकायतों पर डीजीपी ने दी चेतावनी कहा-8 महीने में 33 से ज्यादा जिलों में कीड़े, छिपकली, सांप तक मिले भोजन में, सैकड़ों बच्चे हुए बीमार सहरसा में 150 से अधिक छात्र बीमार, हाईकोर्ट ने खुद लिया था संज्ञान और बच्चों की जान खतरे में बताया डीजीपी बोले-सोशल मीडिया पर वायरल होने से बन सकता है राज्यव्यापी मुद्दा जेन-जी व जेन-अल्फा में बढ़ सकता है असंतोष, गयाजी में पहले ही हो चुका छात्रों का विरोध प्रदर्शन
एमडीएम निदेशक के आदेश
एमडीएम निदेशक ने डीईओ-डीपीओ को दिया आदेश- संवेदनशील स्कूलों पर रखें विशेष निगरानी, शिकायतों पर तुरंत करें कार्रवाई फोटो : एमडीएम : बिारशरीफ के स्कूल में भोजन करते विद्यार्थी। बिहारशरीफ, कार्यालय संवाददाता। मध्याह्न भोजन योजना की गुणवत्ता और वितरण में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों को लेकर अब पुलिस महकमे ने भी चिंता जताई है। विशेष शाखा के पुलिस महानिदेशकने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर आगाह किया है कि राज्य के विभिन्न जिलों में भोजन की गुणवत्ता व वितरण में अनियमितता की घटनाओं से छात्रों व अभिभावकों में असंतोष है, जो सोशल मीडिया पर वायरल होकर राज्यव्यापी चर्चा का रूप ले सकता है और विभिन्न राजनीतिक-सामाजिक संगठन इसे सरकार के खिलाफ आंदोलन का मुद्दा बना सकते हैं।
जनवरी से अगस्त 2026 के बीच की घटनाएँ
इस चेतावनी के बाद एमडीएम निदेशक विनायक मिश्र ने सभी डीईओ व डीपीओ को सख्त आदेश जारी करते हुए संवेदनशील विद्यालयों में विशेष निगरानी और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच राज्य के 33 से अधिक स्थानों से मध्याह्न भोजन में कीड़े, छिपकली, सांप मिलने तथा सैकड़ों बच्चों के बीमार पड़ने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्तमान समय में युवाओं-छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर जेन-जी व जेन-अल्फा समूहों में असंतोष की प्रवृत्ति देखी जा रही है। हाल ही में गयाजी में छात्रों द्वारा खराब मध्याह्न भोजन सहित अन्य समस्याओं को लेकर प्रशासनिक कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया जा चुका है।
आसान कार्रवाई की निर्देश
आठ महीने में दर्जनों जिलों से शिकायतें : निदेशालय द्वारा संलग्न प्रतिवेदन के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच भागलपुर, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, कटिहार, गयाजी, जमुई, मोतिहारी, वैशाली, खगड़िया, सुपौल, औरंगाबाद, पटना, अरवल, नालंदा सहित कई जिलों से भोजन में कीड़े, छिपकली और सड़ा-गला केला मिलने, दुर्गंधयुक्त व सफेद रंग की टिकिया मिलने जैसी घटनाएं सामने आईं। नालंदा के नगरनौसा में एक ही दिन 39 बच्चों की तबीयत बिगड़ी थी।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
जिलावार घटनाओं के विवरण में सबसे गंभीर मामला सहरसा जिले का है। महिषी प्रखंड के राजकीय मध्य विद्यालय, बलुआहा में मध्याह्न भोजन खाने के बाद 150 से भी अधिक छात्रों की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसे लेकर पटना हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। न्यायालय ने इसे बच्चों के जीवन के लिए खतरा बताते हुए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री भागलपुर द्वारा सैंपल की जांच नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई और जांच रिपोर्ट में देरी करने वाले आईओ को निलंबित करने का आदेश दिया।


