सावन के तीसरे सोमवार को शिवालयों में जलाभिषेक के लिए भीड़ उमड़ी
सावन के तीसरे सोमवार को शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और दूध अर्पित किया। महंत नारायण गिरि ने विशेष पूजा अर्चना की। नाग पंचमी का पर्व इस दिन विशेष पुण्यदायी माना गया।

गाजियाबाद, वंदना। सावन के तीसरे सोमवार को शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ा। सुबह से ही जलाभिषेक करने के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतारें लग गई। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, फूल, फल, दूध आदि चढ़ाकर मंगल कामनाएं की। इसके साथ नाग पंचमी पर मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की गई।
नाग पंचमी का पर्व
सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में रविवार रात 12 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थी। रात दो बजे मंदिर के पीठाधीश्वर महंत नारायण गिरि ने भगवान दूधेश्वर नाथ का विधि विधान से अभिषेक पूजन किया। इसके बाद सुबह विशेष पूजा, आरती और भगवान का दिव्य श्रंगार किया गया। इस दौरान मंदिर हर हर महादेव और बम बम भोले के जयघोष से गुंजायमान रहा। मंदिर में देवी मंदिर, द्वारकापुरी के महंत गिरिशानंद गिरि ने धूप-दीप आरती की। श्रंगार सेवा समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल और समिति के सदस्यों ने भगवान दूधेश्वर के दिव्य श्रृंगार की सेवा संभाली। मोहित ने सुबह भगवान का विशेष श्रंगार किया गया। श्रद्धालुओं को व्यवस्थित ढंग से भगवान दूधेश्वर का जलाभिषेक कराने तथा पूजा-प्रसाद आदि की सेवा में मुकेश पंडित का सहयोग रहा।
सेवा व्यवस्था
अरुण भारद्वाज ने अपनी पूरी टीम के साथ सफाई एवं अन्य सेवा व्यवस्थाओं को संभाला। इसके साथ स्वयंभू मंदिर कविनगर, शिवशक्ति धाम डासना, शिव मंदिर नेहरू नगर, प्राचीन शिव मंदिर हरसांव, शिव मंदिर गोविंदपुरम समेत सभी शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
विशेष पुण्य
महंत नारायण गिरि ने बताया कि इस बार सावन का तीसरा सोमवार अत्यंत विशेष है, क्योंकि इस दिन नाग पंचमी का पावन पर्व भी है। उन्होंने कहा कि सोमवार और नाग पंचमी का यह संयोग शिवभक्तों के लिए विशेष पुण्यदायी है। भगवान शिव को सावन मास और सोमवार अत्यंत प्रिय हैं तथा नाग देवता भगवान शिव के कंठ का आभूषण हैं। इस दिन भगवान शिव का गंगाजल, दूध आदि से अभिषेक तथा नाग देवता का श्रद्धापूर्वक पूजन करने से शिव कृपा प्राप्त होती है, जीवन के कष्टों के निवारण की कामना की जाती है और सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगल की प्राप्ति होती है।


