सावन से पहले ही कावड़ यात्रा के रंग में रंगे शिव भक्त
श्रावण मास की शुरुआत से पहले ही शिव भक्तों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। कांवड़िए हरिद्वार से जल लेकर शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं। भक्तों में उमंग और आस्था की झलक साफ दिखाई दे रही है, जैसे किसी ने अपनी माँ को कांवड़ में बैठाया है। यह यात्रा 11 अगस्त को श्रावण मास की शिवरात्रि पर समाप्त होगी।

श्रावण मास की शुरुआत में अभी भले ही करीब 10 दिन का समय शेष है, लेकिन सड़कों पर शिव भक्तों की अटूट आस्था का सैलाब अभी से उमड़ने लगा है। सुदूर राज्यों से आए कांवड़िए हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य और शिवालयों की ओर बढ़ने लगे हैं। हाईवे भगवान भोलेनाथ के जयकारों और बम-बम भोले के उद्घोष से गूंज उठे हैं। इस बार कांवड़ यात्रा में आस्था के कई अनूठे और भावुक कर देने वाले रूप देखने को मिल रहे हैं। कोई श्रवण कुमार की तरह अपनी बुजुर्ग मां को कांवड़ में बैठाकर ला रहा है, तो कोई कठिन साधना करते हुए दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ रहा है।
भक्ति के इस मार्ग पर न उम्र की सीमा आड़े आ रही है और न ही थकान। अपने परिजनों के साथ नन्हें-मुन्हें बच्चे भी हाथों में छोटी-छोटी रंग-बिरंगी कांवड़ थामे पैदल चलते नजर आ रहे हैं।यह सभी शिव भक्त आगामी 11 अगस्त को श्रावण मास की शिवरात्रि के पावन अवसर पर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में पहुंचकर भगवान आशुतोष का पवित्र गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे। सावन की औपचारिक शुरुआत से पहले ही उमड़ी यह भीड़ आने वाले दिनों में यात्रा के और अधिक भव्य होने का संकेत दे रही है।


