आम्रेश्वर धाम श्रावणी मेला 2026 का भव्य समापन, उमड़ा आस्था का सैलाब
तोरपा, प्रतिनिधि। पावन सावन माह के अंतिम दिन आम्रेश्वर धाम में भक्ति, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर मेले का आयोजन किया। इस वर्ष करीब दस लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।

तोरपा, प्रतिनिधि। पावन सावन माह के अंतिम दिन शुक्रवार को सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के अवसर पर प्रसिद्ध आम्रेश्वर धाम में भक्ति, आस्था और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। हर-हर महादेव और बोल-बम के जयकारों से पूरा धाम परिसर गूंजता रहा। स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। एक माह तक चले ऐतिहासिक श्रावणी मेले का विधिवत हवन-पूजन और पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। इस वर्ष पूरे सावन में करीब दस लाख श्रद्धालुओं के धाम पहुंचने का अनुमान है। रात दो बजे से लगी लंबी कतार:
जलार्पण के लिए श्रद्धालुओं की कतार
सावन पूर्णिमा पर जलार्पण के लिए गुरुवार रात से ही दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। रात करीब दो बजे से मंदिर परिसर में लंबी कतार लग गई। परंपरा के अनुसार सुबह 3:30 बजे सरकारी पूजा संपन्न होने के बाद बाबा का द्वार आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। इसके बाद देर शाम तक भक्त कतारबद्ध होकर शिवलिंग पर जल चढ़ाते रहे। सुबह तक जहां दर्शनार्थियों की भीड़ रही, वहीं दोपहर बाद मेले में लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। दोपहर दो बजे के बाद लोगों की भीड़ तेजी से बढ़ने लगी और तीन बजते-बजते पूरा मेला परिसर खचाखच भर गया। मुख्य सड़क पर भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि लोगों को पैदल चलने में भी परेशानी हो रही थी। अनुमान के अनुसार सावन पूर्णिमा के अंतिम दिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु मेले में पहुंचे।
मनोरंजन और खरीदारी का आनंद
आम्रेश्वर धाम के पारंपरिक मेले में धार्मिक आस्था के साथ मनोरंजन का भी लोगों ने भरपूर आनंद लिया। बच्चों और युवाओं ने डिज्नीलैंड, इलेक्ट्रिक झूला, टावर झूला और मौत का कुआं समेत विभिन्न मनोरंजन साधनों का लुत्फ उठाया। मेला परिसर में प्रसाद, खिलौने, श्रृंगार सामग्री और अन्य सामानों की सैकड़ों दुकानें सजी थीं। श्रद्धालुओं ने पूजा-पाठ के साथ खरीदारी भी की।
धाम की भव्य सजावट
सावन पूर्णिमा पर आम्रेश्वर धाम को विशेष रूप से सजाया गया था। मुख्य मंदिर और गर्भगृह रंग-बिरंगे फूलों एवं मालाओं से सजे थे। अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रंगीन रोशनियों से पूरा परिसर जगमगा रहा था। सजे-धजे धाम की भव्यता देखकर श्रद्धालु अभिभूत नजर आए।
सुरक्षा इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। दंडाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष जवानों की तैनाती की गई थी। धाम परिसर में दर्जनों सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनकी निगरानी प्रबंध समिति कार्यालय से की जा रही थी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुलिस सहायता केंद्र और खोया-पाया केंद्र भी बनाए गए थे। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, खूंटी की ओर से सूचना सहायता केंद्र-सह-प्रदर्शनी शिविर लगाया गया था। यहां लोगों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और जिले के पर्यटन स्थलों की जानकारी दी गई।
अखंड हरिकीर्तन और भंडारे का समापन
बुधवार से शुरू हुआ 48 घंटे का अखंड हरिकीर्तन शुक्रवार शाम संपन्न हुआ। पूर्णाहुति के बाद शुद्ध घी से निर्मित प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया। आयोजन को सफल बनाने में आम्रेश्वर धाम प्रबंध समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अध्यक्ष लाल ज्ञानेन्द्र नाथ शाहदेव, महामंत्री मनोज कुमार, उपाध्यक्ष रमेश मांझी, कोषाध्यक्ष संतोष पोद्दार, कृष्णानंद तिवारी, महेंद्र भगत, यमुना गुप्ता, आनंद कुमार, सुरेंद्र गुप्ता, कार्यालय प्रभारी सत्यजीत कुंडू समेत अन्य पदाधिकारी दिन-रात सक्रिय रहे। महामंत्री मनोज कुमार ने बताया कि अंतिम दिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु धाम पहुंचे।
यातायात स्थिति
जापुत से कतारी मोड़ तक लगा भीषण जाम:
मेले के समापन पर भारी भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था भी चरमरा गई। धाम से करीब दो किलोमीटर पहले जापुत से कतारी मोड़ तक खूंटी-सिमडेगा मुख्य पथ पर भीषण जाम लग गया। दोपहर करीब तीन बजे स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दोपहिया वाहनों के साथ पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। जाम में करीब 30 मिनट तक लोग फंसे रहे। इससे श्रद्धालुओं और राहगीरों को काफी परेशानी हुई। सूचना मिलने पर पुलिस ने मोर्चा संभाला और यातायात को नियंत्रित करने में जुट गई। काफी मशक्कत के बाद आवागमन सुचारू कराया गया। भीड़, भक्ति और मेले के उत्साह के बीच आम्रेश्वर धाम में सावन पूर्णिमा का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ。


