कांवरियों की संख्या होने लगी कम, नहीं दिखी भीड़
सामान्य कांवरियों की संख्या 2,19,696 रहीं, जबकि डाकबमों की संख्या 249 रहीं कांवरियों ने कहा,

सुल्तानगंज, निज संवाददाता। श्रावणी मेला में आने वाले कांवरिया कांवर उठाते ही भोले की भक्ति में लीन हो जाते हैं। यहां पहुंच रहे सभी तबके के कांवरिया अजगैवीनाथ धाम पहुंचते ही कांवर सजाने की दुकानों पर जाते हैं। कांवर सजाने के दौरान उनमें भक्ति का भाव अत्यधिक दिखता है। वे अपने कांवर में शिवलिंग, त्रिशूल सहित तरह-तरह की आकर्षक सामग्री लगवाते हैं। कुछ कांवरिया शिवलिंग को कांवर में बिठाते हैं तो कुछ मंदिर के स्वरूप को स्थापित कर धर्मयात्रा पर निकलते हैं। इन्हें देखने के लिए जगह-जगह लोगों की भीड़ उमड़ती रहती है।
कांवर सजाने की प्रक्रिया
एक से बढ़कर एक कांवर ले जाने पर झांकी जैसा नजारा दिखता है। यहां से जल उठाने वाले कांवरिया सामान्य कांवर के अलावा ग्यारह फीट से लेकर 108 फीट तक के आकर्षक कांवर लेकर धर्मयात्रा में जाते हैं। भारी-भरकम और लंबे कांवर को कंधे पर उठाकर जब कांवरिया जत्थे में चलते हैं तो दृश्य काफी आकर्षक लगता है। पानी का जलस्तर बढ़ने से सीढ़ी घाट, मंदिर घाट और नमामि गंगे घाट पर कांवरिया गंगा स्नान कर रहे हैं। महिला कांवरियों को वस्त्र बदलने में परेशानी न हो, इसके लिए मंदिर घाट पर चेंजिंग रूम बनाया गया है। अन्य दिनों की तुलना में आज कांवरियों की भीड़ कम देखी गई। प्रखंड नियंत्रण कक्ष के अनुसार, सोमवार की शाम पांच बजे से मंगलवार की शाम पांच बजे तक सामान्य कांवरियों की संख्या 2,19,696 रहीं। जबकि डाक बमों की कुल संख्या 249 रहीं। जिसमें पुरुषों की संख्या 224 और महिलाओं की संख्या 25 रहीं।
दुकानदारों की मनमानी
बंगाल के कांवरिया सदानंद बम कहते हैं कि हमलोग अपना कांवर बंगाल में ही ले लेते हैं। यहां दुकानदार मनमानी कीमत लेते हैं और सरकारी रेट केवल दिखावा साबित हो रहा है। हरिद्वार के कांवरिया रमाशंकर बम कहते हैं कि दुकानदार जबरन कांवर में सजावट के नाम पर लंबा-चौड़ा बिल बना देते हैं। लफड़े से बचने के लिए कांवरिया दुकानदार की मांग के अनुसार कीमत देने को मजबूर हो जाते हैं। बिजली की आंख-मिचौनी जारी रही।


