वेस्ट यूपी की धरती के माफिक वाली धान पर रिसर्च

हिन्दुस्तान, हापुड़
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कृषि वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए धान की कई उन्नत, सूखा-रोधी और रोग-प्रतिरोधी किस्में विकसित की हैं। ये किस्में पानी की बचत, किसानों की आमदनी में सुधार और अच्छी पैदावार में सहायक हैं। अब लखनऊ से पश्चिमी यूपी के जिलों में 39 धान की वैरायटियों पर रिसर्च चल रही है।

वेस्ट यूपी की धरती के माफिक वाली धान पर रिसर्च

कृषि वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन और घटते जल स्तर को देखते हुए धान की कई उन्नत, सूखा-रोधी और रोग-प्रतिरोधी किस्में विकसित की हैं। इन रिसर्च वैरायटी से पानी की बचत, कम समय में बंपर पैदावार और किसानों की आमदनी में सुधार हुआ है। अब लखनऊ स्तर से पश्चिमी यूपी के जिलों में कौन सी धान बेहतर होगी उनकी 39 वैरायटियों पर रिसर्च किया जा रहा है। जिसके लिए बाबूगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र में 39 वैरायटी की धान की पौध बोई गई है। धान की अच्छी पैदावार तथा उत्तम गुणवत्तायुक्त उत्पादन लेने के लिए अच्छी प्रजाति का चयन अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसलिए पानी के साधन, फसलचक्र व बाजार की मांग की स्थिति को ध्यान में रखकर उपयुक्त प्रजाति का चुनाव करना चाहिए। प्रदेश में पहली बार उपकार संस्था द्वारा धान की सही प्रजातियों का चयन कराया जा रहा है। जिसमें लखनऊ से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के लिए हापुड़ जिले के कृशि विज्ञान केंद्र को चिंहित किया गया है。

केवीसी में नर्सरी तैयार--

कृषि वैज्ञानिक डॉ अशोक सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र में एक एकड़ भूमि में 39 वैरायटी की नर्सरी तैयार कराई गई है। लखनऊ वाली संस्था ने सभी 39 वैरायटी का बीज उपलब्ध कराया है। जिसको एक एकड़ में बोया गया है। प्रत्येक प्रजाति का 100 ग्राम बीज दिया गया है।

नर्सरी के बाद लगाई जाएगी धान--

कृषि वैज्ञानिक डॉ अशोक सिंह ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के लिए अच्छी धान की प्रजातियों का चयन किया जा रहा है। 39 वैरायटी की धान की पौध लगाई जाएगी। जिसके बाद संस्था रिसर्च करेगी कि वेस्ट यूपी के जिलों की धरती में कौन सी प्रजाति सफल होगी।

बासमती धान की उन्नत प्रजातियां---

वैज्ञानिकों के अनुसार अकेली बासमती की कई प्रजाति हैं, लेकिन फिलहाल देखेंगे कि लखनऊ से कौन कौन सी प्रजाति की धान का बीज भेजा गया है।

सामान्य प्रश्न

कृषि वैज्ञानिकों ने किस विषय पर रिसर्च की है?
कृषि वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन और घटते जल स्तर को देखते हुए धान की कई उन्नत, सूखा-रोधी और रोग-प्रतिरोधी किस्मों पर रिसर्च की है।

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Mulit Tyagi

लेखक के बारे में

Mulit Tyagi

मुलित त्यागी पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान हापुड़ में ब्यूरो इंचार्ज पर काम कर रहे हैं।

परिचय एवं अनुभव
मुलित त्यागी भारतीय मीडिया जगत का प्रतिष्ठित नाम हैं जिन्हें पत्रकारिता में 23 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान में (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) हापुड़ ब्यूरो में इंचार्ज हैं। 2007 में गढ़मुक्तेश्वर में भूख से मौत प्रकरण में 44 दिनों तक विशेष खबरें की जिससे जरिए उन्हें पत्रकारिता में मजबूत पहचान मिली। भूख से गरीब की मौत, लखीमपुर में बाढ़ का दंश, बदायूं में दो बहनों की लाश पेड़ पर लटकाना, हापुड़ में अरबों रुपये कीमत की सेना की भूमि पर अवैध कब्जे पर बड़ी कार्रवाई जैसी खबरों का मुलित ने ब्रेक किया है।

कॅरियर का सफर
मुलित त्यागी ने अपने कॅरियर की शुरुआत 2002 में दैनिक जागरण समाचार पत्र से की। यहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। 2003 में अमर उजाला के साथ जुड़े। अमर उजाला में जूनियर सब एडिटर रहते गढ़मुक्तेश्वर तहसील इंचार्ज बनें। 2012 तक वहीं पर लगातार काम किया। एक जनवरी 2013 को हिन्दुस्तान बरेली में ज्वाइन किया और फिर लखीमपुर जिले में ब्यूरो इंचार्ज बनें। 24 फरवरी 2014 को बदायूं जिले में जिम्मेदारी दी गई। अक्तूबर 2014 से हापुड़ ब्यूरो की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बीएससी बायोलॉजी के साथ-साथ बीए और राजनीति विज्ञान में एमए उत्तीर्ण।

कार्य और लक्ष्य
कई मामलों में उन्होंने अनेक एक्सक्लूसिव स्टोरी ब्रेक की हैं। मुलित का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता के साथ सटीक सूचना देने पर केंद्रित है। इसी को केंद्रित करते हुए उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।

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