गंडक किनारे बिखरी पड़ीं हैं चप्पलें, कदमों का पता नहीं
बड़ी गंडक नदी में नेपाल में आयी प्रलय में बहकर चप्पलें और शव मिले हैं। कुशीनगर में अब तक 13 शव बरामद हो चुके हैं। ग्रामीणों ने पहले लकड़ियां और घरेलू सामान देखा, लेकिन शवों के मिलने से स्थिति गंभीर हो गई। पहचान के प्रयास जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई शव पहचान नहीं सका।

गंगेश्वर त्रिपाठी पडरौना। बड़ी गंडक नदी किनारे रेत पर पड़ी ये चप्पलें किसी दुकान की नहीं हैं। न ही इन्हें किसी ने यहां उतारकर रखा है। ये नदी के साथ बहकर आईं हैं। कुछ जोड़ी में हैं, कुछ की जोड़ीदार का पता नहीं। किसी पर कीचड़ की मोटी परत है तो कोई रेत में आधी दबी पड़ी है। इन्हें देखकर बरबस यही सवाल उठता है कि आखिर इन चप्पलों में चलने वाले कदम कहां गए?
जलप्रलय के बाद की स्थिति
छितौनी तटबंध के आसपास गंडक का किनारा इन दिनों ऐसे ही सवालों से भरा है। नेपाल में बुधवार को आई भीषण जलप्रलय के बाद बड़ी गंडक (नारायणी) की धार अपने साथ वहां की तबाही के निशान लेकर हर दिन सीमा पार पहुंच रही है। पहले लकड़ियां और घर-गृहस्थी का सामान आया, फिर कपड़े-बर्तन और दूसरी जरूरत की चीजें दिखीं और अब हर दिन नदी से शव बरामद हो रहे हैं। कुशीनगर में अब तक 13 शव मिल चुके हैं। इन शवों के साथ बहकर आए सामान में बिखरी चप्पलें उस त्रासदी का ऐसा चेहरा बन गई हैं, जिसे देखकर किनारे खड़ा हर व्यक्ति कुछ पल के लिए खामोश हो जाता है। नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। तेज पानी ने नदी किनारे बसे घरों और बस्तियों को प्रभावित किया। देखते ही देखते पानी अपने साथ जो मिला उसे बहाता चला गया। कुशीनगर में नदी का पानी बढ़ा तो उसके साथ बहकर आने वाली चीजों ने लोगों को चौंकाना शुरू कर दिया। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में लकड़ियां और घरेलू सामान दिखाई दिए। इसके बाद कपड़े, बर्तन, सिलेंडर समेत गृहस्थी में इस्तेमाल होने वाली तमाम चीजें मिलने लगीं। लेकिन जब नदी से शव मिलने लगे तो लोगों को समझ आया कि यह सिर्फ बाढ़ का पानी नहीं है, यह किसी के उजड़ चुके घरों और बिछड़ चुके परिवारों की कहानी भी अपने साथ ला रहा है। छितौनी तटबंध के आसपास बिखरी चप्पलें इस त्रासदी को और करीब से महसूस कराती हैं। एक जगह बड़ी चप्पल है तो कुछ दूरी पर दूसरी। कहीं बच्चों के पैरों की छोटी चप्पल पड़ी है। नदी ने इन्हें किस घर से उठाया और कितनी दूर बहाकर लाई, इसका कोई हिसाब नहीं है।
शवों की पहचान का संघर्ष
13 शवों ने बढ़ा दिया नदी का खौफ :
नेपाल की त्रासदी के बाद कुशीनगर में शव मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक 13 शव बरामद हो चुके हैं। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों के लिए यह दृश्य डराने वाला है। पानी में बहती कोई चीज दिखाई देती है तो लोग अब उसे सामान्य नजर से नहीं देखते। कपड़ा दिखता है तो लोग ठिठकते हैं, कोई सामान दिखता है तो उसके पीछे की कहानी सोचने लगते हैं। गंडक किनारे बसे लोगों ने ऐसी बाढ़ कई बार देखी है, लेकिन इस बार नदी का मंजर अलग है। पानी के साथ आने वाली हर वस्तु नेपाल की उस तबाही की गवाही दे रही है, जहां किसी का घर छूटा, किसी की गृहस्थी बही और किसी का अपना पीछे रह गया।
शवों की पहचान की प्रक्रिया
अब तक एक भी शवों की नहीं हो सकी पहचान :
नेपाल त्रासदी के बाद भारतीय सीमा में बड़ी गंडक नदी के रास्ते कुशीनगर में बहकर आये कुल 13 शवों में से छह शव मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखी गई है। कुशीनगर के मोर्चरी में छह फ्रीजर शवों से भर जाने के बाद अन्य शवों को गोरखपुर एम्स व अन्य मोर्चरी में भेजा गया है। जिला प्रशासन की ओर से सभी शवों की तस्वीरों को जारी कर शिनाख्त की कोशिशें शुरू कर दी गईं हैं। मगर, रविवार तक एक भी शव की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। जिला प्रशासन नेपाल सरकार से समन्वय भी स्थापित कर रहा है। वार्ता भी चल रही है। उम्मीद है कि कभी न कभी, कोई न कोई, बरामद शवों की पहचान करने के लिए यहां पहुंचेगा।
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