छह दिन से अपनों की सांस या लाश का इंतजार, बाढ़ पीड़ितों की आंखों में तैर रहे सवाल
नेपाल के नुवाकोट और रसुवा जिलों में विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों को बेसहारा छोड़ दिया है। लापता व्यक्तियों की खोज में लोग भटक रहे हैं, लेकिन संपर्क मार्ग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। प्रशासन क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर का सहारा ले रहा है, लेकिन उम्मीद की किरण टूटती नजर आ रही है।
महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के नुवाकोट और रसुवा जिलों में न केवल घर, सड़कें एवं बाजार बहा दिए हैं, बल्कि हजारों परिवारों को अपनों की तलाश में बेसहारा छोड़ दिया है। कोई अपने बेटे की खोज कर रहा है, कोई भाई की तो कोई अपने पोते की। पिछले छह दिनों से अपनों की एक खबर पाने के लिए भटक रहे पीड़ितों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका परिजन जीवित है या बाढ़ की चपेट में आ चुका है।
लापता लोगों की तलाश
नेपाल रेडक्रॉस सोसाइटी नुवाकोट के अनुसार विदुर-7 के टुप्चे क्षेत्र में 65 से अधिक लोग लापता हैं। आम दिनों में महज 15 मिनट की दूरी पर स्थित टुप्चे तक पहुंचने में अब टूटी सड़कों के कारण आठ घंटे का समय लग रहा है। जलस्तर तो धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन अपनों की तलाश में भटक रहे परिवारों की पीड़ा और इंतजार खत्म होता नजर नहीं आ रहा। नुवाकोट के मैथली बैरक के बाहर लापता लोगों के परिजन छह दिनों से डेरा डाले हुए हैं। आसमान में हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट सुनते ही वे उम्मीद के साथ दौड़ पड़ते हैं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण सड़क संपर्क पूरी तरह ध्वस्त होने से वे घटनास्थल तक पहुंचकर अपनों की खुद तलाश करने में भी असमर्थ हैं।
परिवारों की मुश्किलें
काठमांडू से पहुंचे सुरेंद्र बेलबासे का 25 वर्षीय सिविल इंजीनियर बेटा सुवास बेलबासे त्रिशूली 3 बी हब में कार्यरत था। वह भोटेकोशी की बाढ़ के बाद से लापता है। सुरेंद्र कहते हैं कि अब जीवित मिलने की उम्मीद बहुत कम है, लेकिन यदि रास्ता बन जाता तो कम से कम शव ही नसीब हो जाता। वहीं दोलखा निवासी 74 वर्षीय डिल्ली बहादुर तामांग अपने पोते जगतबहादुर पाख्रिन की तलाश में ढुंगेबाजार पहुंचे हैं। जगत मानसरोवर जाने वाले पर्यटकों के दल के साथ रसुवा के टिमुरे गया था, जिसके बाद से उसकी कोई खबर नहीं है।
सड़क संपर्क की स्थिति
बाढ़ के बाद नुवाकोट का ढुंगेबाजार से आगे का बड़ा क्षेत्र पूरी तरह संपर्कविहीन हो गया है। गल्छी-रसुवागढ़ी मार्ग पर स्थित विदुर नगरपालिका-1 का यह बाजार चीन सीमा की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। प्रशासन ढुंगेबाजार से आगे वैकल्पिक रास्ता बनाने की कोशिश में जुटा है। फिलहाल कई दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर ही एकमात्र जरिया बना हुआ है।
बाजार की तबाही
चहल-पहल वाला बाजार बना मलबे का ढेर। कभी त्रिदेशीय मार्ग के कारण व्यापारिक गतिविधियों से गुलजार रहने वाला ढुंगेबाजार अब पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। करीब 200 मकानों वाले इस बाजार के नौ लोग अब भी लापता हैं। पीड़ित नवाराज उप्रेती की तीन मंजिला इमारत बाढ़ में बह गई, हालांकि उनका परिवार बाल-बाल बच गया। बाजार में स्थित कृषि विकास बैंक, कृषि विकास कार्यालय, पशु सेवा कार्यालय एवं वार्ड कार्यालय भी बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं।


