साल में 2.28 लाख कुंतल मछली खा जाते हैं देवरिया वासी
देवरिया में सालाना 2.28 लाख कुंतल मछली खाई जाती है, जिसमें 56% लोग मांसाहारी हैं, और उनमें से 40% लोग मछली खाते हैं। मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इस वर्ष 1.06 लाख कुंतल मछली का उत्पादन किया गया है, जबकि अन्य जिलों से मांग की पूर्ति की जा रही है।

देवरिया, निज संवाददाता। साल में 2.28 लाख कुंतल मछली जिले वासी खा जाते हैं। कुल 56 फीसदी नानवेज में से 40 फीसदी लोग मछली खाते हैं। साल में एक व्यक्ति 15 किलो मछली खा जाता हैं। लेकिन उत्पाद कम होने से दूसरे जिलों व प्रदेशों की मछली से डिमांड की पूर्ति की जाती है। जिले की आबादी करीब 38 लाख है। इसमें महिला,पुरूष और बच्चे भी शामिल हैं। इस आबादी का कुल 56 फीसदी लोग मांसाहारी हैं। इसमें से 40 फीसदी लोग मछली खाते हैं। मछली खाने के शौकीनों के लिए मत्स्य विभाग द्वारा मछली पालन पर जोर दिया जाता है।
इसके लिए विभिन्न योजनायें संचालित की जाती है। जिसमें मछली पालन करने वालों को तालाब,पोखरा खुदवाने से लेकर मछली पालन करने को अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा मछली पालन और व्यवसाय करने वालों को भी कई तरह की सुविधायें दी जाती है। जिले में 2875 ग्राम पंचायतों का तालाब हैं। जिसमें मछली पालन करने को पट्टा दिया गया है। इसके अलावा 184 निजी क्षेत्र के तालाब हैं। जिसमें मछली पालन किया जाता है। तालाब के अलावा 5 टैंक में भी मछली किया जाता है। मत्स्य विभाग की खुखुन्दू में आधा दर्जन हेचरी भी हैं,जहां पर मछली का बच्चा पैदा किया जाता है। मछली का उत्पादन करने को छोटी गण्डक, सरयू और घाघरा नदी को भी पट्टे पर दिया जाता है। जिले में 2.20 कुंतल मछली पालन का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष इस साल जुलाई माह तक 1.06 लाख कुंतल मछली का उत्पादन किया गया है। मांग अधिक होने से दूसरे प्रदेशों, जिलों की मछली से इसकी पूर्ति की जाती है।


