पूर्व में पॉजिटिव हुए लोगों को डेंगू का ज्यादा खतरा
ज्ञानपुर में स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जिन मरीजों को पहले डेंगू हुआ है, उन्हें फिर से गंभीर प्रकार के डेंगू का खतरा होता है। डेंगू के चार प्रकार हैं - डेन-1, डेन-2, डेन-3 और डेन-4। विशेष रूप से डेन-2, जिसे हैम्ब्रेजिक डेंगू कहा जाता है, इससे मरीज की जान को खतरा होता है।

ज्ञानपुर, संवाददाता। जिन मरीजों को एक बार डेंगू हो जाता है, उन्हें आगे भी बीमारी का खतरा बना रहता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग उन लोगों को डेंगू के प्रति अधिक सचेत रहने की जरूरत समझा रहा है जिन्हें पहले कभी डेंगू हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग डेंगू के चार प्रकार बताता है। डेन-1, डेन-2, डेन-3 और डेन-4। सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक ने बताया कि पहली बार जब डेगू पॉजिटिव मच्छर किसी को काटता है आमतौर 80 फीसदी लोगों को डेंगू-1 होता है। इसे क्लासिक डेंगू भी कहा जाता है। मरीज के स्वस्थ होने तक उसके शरीर में सीरो टाइप डेंगू-1 के लिए एंटीबॉडी विकसित हो जाती है।
इसलिए संबंधित व्यक्ति को डेंगू का डेन-1 टाइप फिर कभी नहीं हो सकता। लेकिन ऐसे मरीजों को जब दोबारा डेंगू होता है तो उन्हें डेन-2 होने का खतरा बहुत अधिक होता है। इसे डीएचएस अथवा हैम्ब्रेजिक डेंगू कहा जाता है। डेन-1 टाइप में जहां अधिकांश मरीज घर पर रहते हुए भी इलाज कराकर स्वस्थ हो जाते हैं वहीं डेन-2 में उसकी जान पर बन आती है। डेन-1 की अपेक्षा डेन-2 में अधिक तेज बुखार, अधिक तेज दर्द होता है। प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरने लगती है। ऐसे में इन मरीजों को सेहत के प्रति खास सावधानी बरतने की जरूरत है।


