विशेष टीईटी में शामिल करने को कोर्ट पहुंचे शिक्षामित्र
प्रयागराज में शिक्षामित्रों द्वारा विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा में अवसर की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाकर्ता यह तर्क दे रहे हैं कि वे नए अभ्यर्थी नहीं हैं और उनके अनुभव को नजरअंदाज कर परीक्षा में शामिल नहीं करना उचित नहीं है। कोर्ट में सुनवाई 16 सितंबर को होगी।

प्रयागराज संजोग मिश्र उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से सेवारत एवं विशेष शिक्षकों के लिए कराई जा रही विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में अवसर देने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की है। कुमारी गुलाबी एवं 126 अन्य शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्हें भी स्पेशल टीईटी में बैठने का अवसर दिया जाए, ताकि वे नियमित शिक्षक बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकें।
शिक्षामित्रों का तर्क
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शिक्षामित्र कोई नए अभ्यर्थी नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी योग्यता, सेवाकाल और अनुभव को नजरअंदाज कर विशेष टीईटी से बाहर रखना उचित नहीं है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई के बाद अब इसे 16 सितंबर को प्रतीक मिश्रा व तीन अन्य की याचिका के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है।
विशेष टीईटी के लिए योग्यता में छूट को दी चुनौती
प्रयागराज। हाईकोर्ट में बीटीसी (डीएलएड), बीएड एवं दूरस्थ बीटीसी पास प्रतीक मिश्रा एवं दो अन्य अभ्यर्थियों ने विशेष टीईटी के लिए निर्धारित योग्यता में छूट को चुनौती दी है। याचिका में दो सितंबर के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें राज्य सरकार ने सेवारत शिक्षकों की टीईटी योग्यता संबंधी शर्त को शिथिल कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2025 को अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य मामले में फैसला सुनाया था कि सेवारत शिक्षकों को दो साल के अंदर टीईटी पास करना अनिवार्य है। पुनर्विचार याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने दो वर्ष की छूट को तीन वर्ष कर दिया है। इस तरह से सेवारत शिक्षकों को एक सितंबर 2028 के पूर्व टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। याचियों का आरोप है कि राज्य सरकार के आदेश से सुप्रीम कोर्ट के फैसले एवं आरटीई एक्ट 2009 की मूल भावना का उल्लंघन हो रहा है। इस मामले की सुनवाई 16 सितंबर को होगी।


