ओरमांझी में कुड़मी समाज ने मनाया अन्याय दिवस
झारखंड कुरमी विकास परिषद और झारखंड कुरमी महासभा की संयुक्त बैठक में 6 सितंबर को अन्याय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। बैठक में पिछले 73 वर्षों से कुरमी-कुड़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग की गई, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया।

ओरमांझी, प्रतिनिधि। झारखंड कुरमी विकास परिषद और झारखंड कुरमी महासभा की संयुक्त बैठक रविवार को आरटीसी बीएड कॉलेज, बूटी में हुई। अध्यक्षता रणधीर कुमार चौधरी ने की। बैठक में समाज के लोगों ने 6 सितंबर को अन्याय दिवस के रूप में मनाया। मुख्य अतिथि पूर्व सांसद रामटहल चौधरी, मनोज वाजपेयी, डॉ. पारसनाथ महतो, डॉ. रुद्र नारायण महतो, डॉ. धनेश्वर महतो, झारखंड कुरमी महासभा के अध्यक्ष कारीनाथ महतो, संतोष महतो, सुरेंद्र महतो और अशोक महतो समेत अन्य लोग शामिल हुए।
बैठक की मुख्य बातें
बैठक में कहा गया कि 6 सितंबर 1950 को भारत सरकार की अधिसूचना संख्या एसआरओ 510 के तहत अनुसूचित जनजाति आदेश 1950 पारित हुआ था। इसमें विभिन्न राज्यों की अनुसूचित जनजातियों की सूची बनाई गई थी। वक्ताओं के अनुसार 1931 की जनगणना में कुरमी-कुड़मी जनजाति की गणना आदिम जनजाति के रूप में हुई थी, लेकिन बाद में इसे सूची से हटा दिया गया, जबकि अन्य जनजातियों को सूची में शामिल किया गया।
संवैधानिक अधिकार की मांग
वक्ताओं ने कहा कि उस समय तत्कालीन सांसदों ने कुरमी-कुड़मी को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त पत्र तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा था। उन्होंने राज्य सरकार की अनुशंसा पर इसे सूची में शामिल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक मांग पूरी नहीं हुई। तब से समाज अपने संवैधानिक अधिकार के लिए आंदोलनरत है। बैठक में मोहन महतो, रामलाल महतो, समलनाथ महतो, रामनाथ महतो, जगेश्वर महतो, साहेबराम महतो, अजित महतो, सुरेश प्रसाद, संजय महतो, रामेश्वर प्रसाद, जितेंद्र महतो, संजय कुमार महतो, शिल्पा महतो और विमला देवी समेत अन्य लोग मौजूद थे।


