संताली किताबें ओल चिकी में छापने की मांग का स्वागत
दुमका, प्रतिनिधि।संताली किताबें ओल चिकी में छापने की मांग का स्वागतसंताली किताबें ओल चिकी में छापने की मांग का स्वागतसंताली किताबें ओल चिकी में छापने

संताली किताबें ओल चिकी में छापने की मांग का स्वागत दुमका, प्रतिनिधि।
बैठक का आयोजन
दिसोम मांझी थान दुमका परिसर में विभिन्न सामाजिक संगठनों, आदिवासी छात्र-छात्राओं और भाषा प्रेमियों की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में बताया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी जी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि एनसीईआरटी एवं अन्य संबंधित शैक्षणिक सामग्री को संताली भाषा की अपनी मौलिक ओल चिकी लिपि में प्रकाशित किया जाए। उनके इस ऐतिहासिक और सराहनीय कदम के लिए समस्त संताल आदिवासी समाज की ओर से माननीय पूर्व मुख्यमंत्र रघुवर दास को हार्दिक बधाई एवं जोहार प्रकट किया गया।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
छात्र-छात्राओं ने कहा कि संताली भाषा 8वीं अनुसूची में शामिल है और इसकी अपनी वैज्ञानिक लिपि ओल चिकी है। इस ओल चिकी लिपि का यूनिकोड भी प्राप्त है। एनसीईआरटी की किताबें ओल चिकी में प्रकाशित होने से झारखंड, बंगाल, ओडिशा, बिहार सहित देशभर के लाखों संताली विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी और पंडित रघुनाथ मुर्मू का सपना साकार होगा। इस मौके पर सुभाष किस्कू, सुनील हेम्ब्रम, सोनेलाल सोरेन, अर्जुन मुर्मू , जोसेफ टुडू, पकू हेम्ब्रम, सेलिना हांसदा, सुंदरी टुडू, निशा सोरेन, सिमोन मरांडी, साहेबराम किस्कू, अर्जुन टुडू, बिकास टुडू सहित कई समाजिक कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
फोटो संख्या- 46-दिसोम मांझी थान में आदिवासी समाज के लोग


