रामलीला मैदान के शुद्धीकरण मामले के विरोध में राष्ट्रपति को ज्ञापन
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कुछ लोगों ने शुद्धिकरण के लिए गंगाजल का छिड़काव किया, जिसके विरोध में संवैधानिक अधिकार संघर्ष समिति ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर न्यायिक जांच की मांग की है। समिति ने इसे सामाजिक समानता के खिलाफ बताया और संविधान के अनुशासन का हवाला दिया।

हल्द्वानी, संवाददाता। रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद किए गए कथित शुद्धीकरण के विरोध में संवैधानिक अधिकार संघर्ष समिति ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। समिति के नेतृत्व में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने नगर मजिस्ट्रेट के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया। बीते आठ अगस्त को हल्द्वानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खरगे ने जनसभा को संबोधित किया था। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ लोगों ने मैदान परिसर में गंगाजल का छिड़काव, धुलाई और हवन कर कथित रूप से शुद्धीकरण किया।
समिति ने इस कार्रवाई को सामाजिक समानता और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध बताया। कहा कि खरगे दलित समाज से आते हैं और उनकी सभा में एससी, एसटी और ओबीसी एवं अन्य वर्गों के लोग शामिल हुए थे। समिति ने आरोप लगाया कि इस तरह का कृत्य सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देने वाला है। ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 17 और 21 का हवाला देते हुए एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की गई। समिति ने राष्ट्रपति से उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच करने, वीडियो फुटेज और सीसीटीवी के आधार पर आरोपित लोगों की पहचान कर मुकदमा दर्ज करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी करने की मांग की।ज्ञापन देने वालों में दीपक चनियाल, मुकेश बौद्ध, आरपी गंगोला, जीआर आर्य, राधा आर्य, शेखावत हुसैन, आफताब आलम, महेश चंद्र आर्य, जीआर टम्टा, पीआर टम्टा, नफीस अहमद खान, गोपाल गैसिकोटी, नरेंद्र, आरपी चनियाल, बच्ची लाल, आरआर आर्य, सोहन लाल, पंकज अंबेडकर, मोहन गासिकोटी, जीतराम, गंगा प्रसाद और गजेंद्र पाल आदि शामिल रहे।


