मिशन एडमिशन हेल्पलाइन: अधिक कॉलेज व कोर्स का चयन करना लाभदायक
दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अभ्यर्थियों की पसंद और वरीयता संबंधी कई सवालों के जवाब डीयू के डीन एडमिशन प्रो. हनीत गांधी ने दिए हैं। वरीयता को भरते समय कॉलेज और पाठ्यक्रम का सही चयन महत्वपूर्ण है।

दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कॉलेज, कोर्स,सीट आवंटन, सीएसएएस पोर्टल, दस्तावेज या दाखिले से जुड़ा कोई भी सवाल आपके मन में है तो बेझिझक पूछिए। हिन्दुस्तान आपके लिए लेकर आया है 'हेलो हिन्दुस्तान' हेल्पलाइन। अपने सवाल हमें इस मेल आईडी hellohindustan@livehindustan.com पर ईमेल करें। जो सवाल आए हैं उसका जवाब दिया है डीयू की डीन एडमिशन प्रो.हनीत गांधी ने -- 1. प्रश्न: वरीयता (प्रेफरेंस) क्या होती है? इसे हम कैसे तय करें?
प्राथमिकता के प्रश्न
उत्तर: वरीयता का अर्थ है कि आप किस कॉलेज और किस पाठ्यक्रम में सबसे पहले प्रवेश लेना चाहते हैं। सामान्य सीट आवंटन प्रणाली (सीएसएएस) में अभ्यर्थी को अपनी पसंद के अनुसार कॉलेज और पाठ्यक्रम का क्रम तय करना होता है। विश्वविद्यालय उसी क्रम, पात्रता और मेरिट के आधार पर सीट आवंटित करता है।
कॉलेज और पाठ्यक्रम की पसंद
2. प्रश्न: क्या सबसे पसंदीदा कॉलेज और पाठ्यक्रम को पहले स्थान पर रखना चाहिए? इससे दाखिला मिल जाएगा।
उत्तर: पसंदीदा कॉलेज व कोर्स का चयन दाखिला का आधार नहीं है। हालांकि वरीयता उसी क्रम में भरनी चाहिए, जिस क्रम में आप वास्तव में प्रवेश लेना चाहते हैं। यह सोचकर किसी विकल्प को नीचे न रखें कि वहां प्रवेश नहीं मिलेगा। यदि आपकी मेरिट बनेगी, तो विश्वविद्यालय उसी क्रम के अनुसार सीट आवंटित करेगा।
अधिक वरीयता भरने के लाभ
3. प्रश्न: क्या अधिक से अधिक वरीयता (प्रेफरेंस) भरना लाभदायक है?
उत्तर: हां। यदि आप पात्र हैं तो अधिक से अधिक कॉलेज और पाठ्यक्रम चुनना बेहतर माना जाता है। इससे सीट मिलने की संभावना बढ़ जाती है। कम विकल्प भरने पर आपके अवसर सीमित हो सकते हैं।
प्रसिद्ध कॉलेज का चयन
4. प्रश्न: क्या वरीयता (प्रेफरेंस) भरते समय केवल प्रसिद्ध कॉलेज ही चुनने चाहिए?
उत्तर: नहीं। वरीयता आपकी वास्तविक पसंद के आधार पर होनी चाहिए। केवल लोकप्रिय कॉलेज चुनकर अन्य अच्छे विकल्प छोड़ देना उचित नहीं है। यदि आपकी मेरिट शीर्ष कॉलेज में नहीं बनती और आपने अन्य विकल्प नहीं भरे हैं, तो सीट मिलने का अवसर कम हो सकता है।
विषय संयोजन की प्रक्रिया
5. प्रश्न: विषय संयोजन (सब्जेक्ट मैपिंग) क्या है?
उत्तर: विषय संयोजन वह प्रक्रिया है, जिसमें विश्वविद्यालय यह जांचता है कि आपने बारहवीं में जिन विषयों का अध्ययन किया था, उन्हीं या उनसे संबंधित विषयों में आपने सीयूईटी (यूजी) परीक्षा दी है या नहीं। पात्रता इसी आधार पर तय की जाती है।


