राष्ट्रीय ध्वज लगाने से पहले पीडब्ल्यूडी करवा रही अध्ययन
नई दिल्ली में 500 जगहों पर लगाए गए तिरंगे की देखरेख के लिए पीडब्ल्यूडी ने अध्ययन कराने का निर्णय लिया है। तिरंगे के फटने और काले पड़ने की समस्या का समाधान खोजा जाएगा। पहले पांच जगहों पर ट्रायल होगा, एवं सफल होने पर अन्य स्थानों पर लगाया जाएगा।

नई दिल्ली प्रमुख संवाददाता राजधानी में 500 जगहों पर लगाए गए राष्ट्रीय ध्वजों की बेहतर देखरेख के लिए पीडब्ल्यूडी डिजाइनर कंपनी से इसे लेकर अध्ययन कराएगी। बार-बार तिरंगे के फटने एवं काले पड़ने का समाधान इस अध्ययन में तलाशा जाएगा। उनके सहयोग से नए डिजाइन एवं कपड़े के साथ तिरंगा झंडा तैयार किया जाएगा। पहले पांच जगहों पर तिरंगा लगाकर इसका ट्रायल होगा और उसके बाद अन्य जगहों पर तिरंगा लगाया जाएगा।
तिरंगे की देखरेख
जानकारी के अनुसार राजधानी में लगभग 500 जगह ऊंचे पोल पर तिरंगा झंडा लगाया जाता है। प्रत्येक वर्ष 4 बार (26 जनवरी, 15 अगस्त और दो अन्य अवसर) इस झंडे को बदला जाता है जबकि पांच बार इसे साफ कर दोबारा लगाया जाता है। बीते दिनों दिल्ली के विभिन्न इलाकों से तिरंगे के फटने की शिकायतें मिल रही थी। इसके चलते पीडब्ल्यूडी द्वारा इन झंडों को उतार लिया गया था। अधिकारियों ने जब मौजूदा झंडे का कपड़ा देकर विशेषज्ञों से बात की तो पता चला कि तेज हवा की वजह से यह फट जा रहा है। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने विशेषज्ञों से अध्ययन करने को कहा है जिससे पता चले कि किस तरह का कपड़ा इसमें इस्तेमाल होना चाहिए। इसके साथ ही इसका आकार कितना बड़ा रखा जाए जिससे यह तेज हवा में न फटे।
विशेषज्ञों का अध्ययन
पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि अध्ययन करने के बाद यह कंपनी बेहतर गुणवत्ता वाले पांच झंडे उन्हें देगी जिसे अलग-अलग क्षेत्रों में ट्रायल के तौर पर लगाया जाएगा। इससे पता चलेगा कि यह कपड़ा कितना मजबूत है और तेज हवाओं का इस पर क्या असर रहता है। कितने दिनों में यह काला पड़ता है। ट्रायल में सकारात्मक परिणाम मिले तो सभी 500 जगहों पर टेंडर कर इस तरह का तिरंगा झंडा लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब नये टेंडर में तिरंगे झंडे के कपड़े को धुलवाने की जगह बदलने का ही प्रावधान रखा जाएगा।


