Delhi Police big disclosure in JNU violence on January 5 at Jawaharlal Nehru University Live Updates - जेएनयू हिंसा मामले में फंसी छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष, दिल्ली पुलिस ने 9 संदिग्ध हमलावरों के फोटो दिखाए DA Image
21 फरवरी, 2020|11:39|IST

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जेएनयू हिंसा मामले में फंसी छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष, दिल्ली पुलिस ने 9 संदिग्ध हमलावरों के फोटो दिखाए

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने नौ संदिग्धों की तस्वीर जारी करके दावा किया कि जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष भी उनमें से एक थीं।पुलिस ने कहा कि नौ में से सात वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े हैं, जबकि दो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीप) से जुड़े हैं। हमलावरों के रूप में नाम लिए जाने के बाद जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि मेरे पास भी सबूत हैं कि किस प्रकार मुझ पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के पास जो भी साक्ष्य हैं, उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए।  

हिंसा में आइशी घोष के अलावा जिन छात्रों की पहचान हुई है उनमें चुनचुन कुमार, पंकज मिश्रा, योगेंद्र भारद्वाज, प्रिय रंजन, शिवपूजन मंडल, डोलन, सुचेता तालुकदार और वसकर विजय के नाम शामिल हैं। जेएनयू हिंसा मामले में कुल तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं। पहला केस सर्वर रूम को नुकसान पहुंचाने का, दूसरा केस रजिस्ट्रेशन करवाने वाले छात्रों के साथ मारपीट करने का और तीसरा केस हॉस्टल में घुसकर हमला करने का है।

Dr. Joy Tirkey, DCP/Crime, Delhi Police on #JNUViolence: No suspect has been detained till now, but we will begin to interrogate the suspects soon. pic.twitter.com/WtpqVvx1nb

इस केस की जांच कर रही दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के डीसीपी डॉ जॉय तिर्की ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि एक जनवरी से पांच जनवरी के बीच काफी संख्या में छात्र विंटर सेमेस्टर में पंजीकरण कराना चाहते थे, लेकिन वामपंथी संगठन के छात्र उन्हें ऐसा नहीं करने दे रहे थे।  डीसीपी ने 5 जनवरी को हुई हिंसा के बारे में कहा कि विश्वविद्यालय के पेरियार हॉस्टल और साबरमती हॉस्टल के कुछ खास कमरों को निशाना बनाया गया। उन्होंने बताया कि पहचान किए गए छात्रों को अभी तक हिरासत में नहीं लिया गया है, लेकिन जल्दी ही उनसे पूछताछ शुरू की जाएगी। पहचान किए गए छात्रों को नोटिस भेजा गया है और उनसे स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मंदीप सिंह रंधावा ने कहा कि  पहचान किए गए लोगों को जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा ताकि इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। उन्होंने कहा कि जेएनयू हिंसा की जांच से संबंधित कई तरह गलत जानकारियां अलग-अलग माध्यमों से लोगों को परोसी जा रही थीं, इसलिए फिलहाल जांच जहां तक बढ़ी है उसके बारे में मीडिया को जानकारी देने का निर्णय लिया गया है। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि मामला एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय का और वहां के छात्रों से जुड़ा है, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गंभीरता से हर पहलुओं की जांच की जा रही है।

जेएनयू प्रशासन की ओर से एक जनवरी से पांच जनवरी अगले सेमेस्टर में दाखिला लेने के लिए रजिस्ट्रेशन की तिथि घोषित की गई लेकिन वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से रजिस्ट्रेशन का विरोध किया गया। दरअसल, जेएनयू छात्रसंघ खासकर स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आईसा), ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट फेडरेशन (डीएसएफ) की ओर से बढ़ी हुई फीस को वापस लेने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा था।  डीसीपी ने कहा कि ज्यादतर छात्रों का कहना था कि उनको रजिस्ट्रेशन करने से रोका जाता था और धमकाया जाता था। 3 जनवरी को चार छात्र संगठनों ने सर्वर रूम में जाकर छेड़छाड़ की और स्टॉफ के साथ धक्कामुक्की भी की। 

डॉ तिर्की ने बताया कि 3 जनवरी को वाम समर्थक छात्र रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए जबरन सर्वर कक्ष में घुस गए और कर्मचारियों से धक्का-मुक्की कर बाहर निकाल दिया। इसके बाद छात्र संगठनों के सदस्यों ने सर्वर बंद कर दिया। सर्वर को ठीक किया गया और छात्रों ने 4 जनवरी को एक बार फिर सर्वर ठप करने का प्रयास किया। इसके लिए दोपहर में कुछ छात्रों ने पिछले शीशे के दरवाजे से सर्वर कक्ष में प्रवेश किया और उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया। इसकी वजह से रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया ठप हो गई। एसआईटी प्रमख ने बताया कि इन दोनों मामलों में एफआई आर दर्ज की गई है। 

5 जनवरी को विश्वविद्यालय कैंपस में हिंसक घटनाएं हुईं। दोपहर बाद पेरियार हॉस्टल में नकाबपोशों ने पहले हमलावरों ने चुन-चुनकर छात्रों को मारा। मारपीट करने वाले छात्रों में छात्र संघ अध्यक्ष सुश्री घोष भी शामिल थीं। उसी दिन शाम को साबरमती हॉस्टल में नकाबपोश हमलावरों ने तोड़फोड़ और हिंसा की। इस हिंसा में भी शामिल कुछ छात्रों की पहचान हुई है। डॉ तिर्की ने बताया की कुछ छात्रों की फोटो सीसीटीवी में आ गई है। उन्होंने कहा कि हिंसा पर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जेएनयू में हिंसा करने के लिए वॉट्सऐप ग्रुप (यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट) भी बनाए गए थे। दोनों होस्टलों में कुछ खास कमरों को ही निशाना बनाया गया। हिंसा के सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले हैं, लेकिन वायरल वीडियो के जरिए आरोपियों की पहचान की गई है। आरोपियों की पहचान के लिए कुछ छात्रों, शिक्षकों, हॉस्टल वाडेर्न तथा अन्य चश्मदीदों की भी मदद ली गई है। 

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