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चिंताजनक: दिल्ली में गायब हुए बच्चों को तलाश करने में लगातार पिछड़ रही पुलिस

राजधानी से गायब हुए बच्चों को तलाश करने में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) लगातार पिछड़ रही है। लापता बच्चों (Children) को ढूंढ़ने का प्रतिशत पिछले 10 सालों में करीब 45 फीसदी घट गया है। वर्ष 2008 में पुलिस गायब हुए बच्चों में से 95 फीसदी को ढूंढ़ लेती थी। अब वह मात्र 51 फीसदी बच्चों को तलाश पा रही है। बच्चों को तलाशने के लिए कई नए सॉफ्टवेयर और तकनीक का इस्तेमाल करने का दावा किया जाता है, लेकिन परिणाम लगातार घट रहा है।

पिछले चार सालों के भीतर गायब हुए आठ हजार बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। यह खुलासा पिछले साल राज्यसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में हुआ। रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2015 से 2018 के बीच चार सालों में 27356 बच्चे दिल्ली से लापता हुए हैं। इनमें से 19596 बच्चों को पुलिस बरामद कर पाई है, जबकि करीब आठ हजार बच्चे अभी भी लापता हैं। 

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पुलिस बच्चों की तलाश के लिए कई नए सॉफ्टवेयर इस्तेमाल कर रही है, फिर भी इस काम में कोई तेजी नहीं आई है। पुलिस का तर्क है कि गायब हुए बच्चों को ढूंढ़ने की दर को घटा हुआ नहीं मानना चाहिए। दरअसल, जैसे-जैसे बच्चे बरामद होते हैं या फिर वे खुद लौट आते हैं तो उसी क्रम में यह आंकड़ा अपडेट होता है। इस कारण हाल ही के मामलों की अपडेट कम होता है, जबकि पुराने मामलों में बरामदगी होती रहती है और उसे अपडेट किया जाता है तो उसका प्रतिशत भी बढ़ता जाता है। 

गायब होने वाले बच्चों में अधिकांश गरीब घरों से होते हैं। इनमें से अधिकांश केस अनसुलझे रहते हैं। हालांकि, हाईप्रोफाइल मामलों में तत्काल कार्रवाई की जाती है। दूसरे राज्यों के साथ सामंजस्य बैठाने में भी दिक्कत आती है। सॉफ्टवेयर और तकनीक का सही इस्तेमाल नहीं किया जाता है। 

फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर (एफआरएस) किसी भी बच्चे के चेहरे की बनावट का ब्योरा दर्ज कर लेता है और 'ट्रैक चाइल्ड पोर्टल पर उपलब्ध तस्वीरों व डाटा से उसका मिलान करता है। अगर पुलिस के डाटाबेस में उससे जुड़ी जानकारी होती है तो तत्काल बच्चे के बारे में पता चल जाता है। सीसीटीवी लगे किसी भी शहर से लापता हुए बच्चे की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराए जाते ही पुलिस सीसीटीवी के जरिए उसकी तलाश करेगी। आगे गुमशुदा वयस्कों के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। 

बीते दिनों अदालत द्वारा बच्चों के गायब होने की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाए जाने के बाद पुलिस ने संबंधित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर ट्रैक चाइल्ड पोर्टल शुरू किया था। इस पोर्टल पर गायब बच्चों का डाटा (तस्वीरों के साथ) उपलब्ध कराया गया है। साथ ही चेहरे की पहचान करने वाले फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर (एफआरएस) का इस्तेमाल कर गुमशुदा बच्चों की तलाश की जाती है। 

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  • Web Title:delhi police are not successful in finding children