बिजली संयंत्र सल्फर डाइऑक्साइड का कर रहे उत्सर्जन
नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली-एनसीआर में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन बढ़ रहा है। 300 किलोमीटर के दायरे में 37 संयंत्रों में से 81 प्रतिशत को फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन (एफजीडी) प्रणाली लगाने से छूट मिली हुई है। 2025 तक 1.54 लाख टन सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन का अनुमान है।

नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली-एनसीआर के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हो रहा है। इनमें से 81 प्रतिशत हिस्सा उन संयंत्रों से आता है, जिन्हें फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन (एफजीडी) प्रणाली लगाने से छूट मिली हुई है। यह दावा ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (सीआरईए) की रिपोर्ट में किया गया है। फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) एक महत्वपूर्ण वायु प्रदूषण नियंत्रण तकनीक है, जिसे जीवाश्म ईंधन से चलने वाले बिजली संयंत्रों, औद्योगिक बॉयलरों और रासायनिक भट्टियों से निकलने वाले धुएं से सल्फर डाइऑक्साइड को हटाने के लिए डिजाइन किया गया है ।रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के 300 किलोमीटर के दायरे में 37 कोयला आधारित बिजली संयंत्र हैं।
इनमें से 25 संयंत्रों के उपलब्ध आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इन संयंत्रों से वर्ष 2025 में करीब 1.54 लाख टन सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होने का अनुमान है।रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2015 में सरकार ने सभी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में एफजीडी लगाना अनिवार्य किया था। लेकिन, जुलाई 2025 में नियम बदलने के बाद देश के 78 प्रतिशत संयंत्रों को इससे छूट दे दी गई।


