सर्वाइकल कैंसर से बचाव में पिछड़ी दिल्ली

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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देश में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीकों की 80 लाख डोज दी गई हैं, लेकिन दिल्ली ने इस में पीछे रह गया है। दिल्ली में केवल 18 प्रतिशत लड़कियों को ही टीका लग पाया है। हर साल करीब 78-80 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है, इसीलिए HPवी का टीकाकरण अभियान फरवरी में शुरू किया गया था।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव में पिछड़ी दिल्ली

नई दिल्ली। देश में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए भले ही एचपीवी (ह्यूमन पेपिलोमा वायरस) टीके की 80 लाख डोज दी जा चुकी है कि लेकिन इस अभियान में दिल्ली पिछड़ गई। स्थिति यह है कि दिल्ली में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में अब तक सिर्फ 18 प्रतिशत लड़कियों को ही एचपीवी का टीका लग पाया है। बता दें कि देश में हर वर्ष सर्वाइकल कैंसर से करीब सवा लाख महिलाएं पीड़ित होती हैं और 78-80 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है। इसका कारण ज्यादातर महिला मरीजों में बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में नहीं हो पाना है। सर्वाइकल कैंसर का बड़ा कारण एचपीवी का संक्रमण है, जिसका टीका उपलब्ध है।

लिहाजा, इस बीमारी रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने इस वर्ष फरवरी में देश भर में एचपीवी का टीकाकरण अभियान शुरू किया।इसके तहत दिल्ली में भी 14 से 15 वर्ष के बीच की उम्र की 1.49 लाख लड़कियों को एचपीवी टीके की एक डोज दिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। दिल्ली को एचपीवी टीके की 1.49 लाख डोज उपलब्ध भी करा दी गई। शुरुआती में यह अभियान तीन महीने के लिए शुरू किया गया था। अब केंद्र ने इसको 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में अब तक कुल 26,800 बच्चियों को एचपीवी टीका लगाया गया है, जो निर्धारित लक्ष्य का सिर्फ 18 प्रतिशत है। टीके के प्रति हिचकिचाहट व भ्रांतियां कम टीकाकरण का कारण बनीं। दिल्ली के सरकारी डिस्पेंसरियों व स्वास्थ्य केंद्रों में सप्ताह में प्रत्येक कार्य दिवस के दिन एचपीवी टीका लगाया जा रहा है।

Ranvijay Singh

लेखक के बारे में

Ranvijay Singh

परिचय एवं अनुभव: रणविजय सिंह को पत्रकारिता में करीब 19 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर प्रमुख संवाददाता स्वास्थ्य, दिल्ली मेट्रो, पेयजल और सामाजिक सरोकार की खबरें कवर करते हैं। इन्हें अपराध, अदालत, तिहाड़ जेल, कृषि, खेल, राजनीति, अन्ना आंदोलन, मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय व दिल्ली सरकार को कवर करने का अनुभव है। कोरोना माहामरी, मायापुरी रेडिएशन, निर्भया कांड, लोकसभा, दिल्ली विधानसभा व नगर निगम चुनाव कवर कर चुके हैं। वह करीब एक दशक से अधिक समय से स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर लगातार शोधपरक स्टोरीज लिख रहे हैं। पत्रकारिता के बदलते ट्रेंड्स, डिजिटल कंटेंट व पाठकों की रुचि के अनुरूप अपनी मजबूत पकड़ बनाई है।


करियर का सफर
अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2007 में दैनिक जागरण से की और 18 वर्ष से अधिक समय तक जुड़े रहे। जहां उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियां सीखी और रिपोर्टिंग में अपनी पकड़ मजबूत की और प्रिंट के लिए पत्रकारिता करते हुए दैनिक जागरण डिजिटल प्लेटफार्म के लिए भी कांटेंट तैयार किए। वह पांच अगस्त 2025 को हिन्दुस्तान से जुड़े।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और स्वास्थ्य रिपोर्टिंग
बायोलॉजी से 12वीं करने के बाद स्नातक मानविकी संकाय संकाय से की। बाद मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा करने से विज्ञान, सामाजिक विज्ञान व पत्रकारिता का अनूठा संयोजन मिला।इससे सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों के साथ-साथ मेडिकल बीट पर भी बेहतर तकनीकी समझ विकसित हुई।


विजन
स्वास्थ्य के विषय पर मजबूत पकड़ के साथ पर्यावरण, सामाजिक सरोकार व राजनीति के विषयों की भी गहरी समझ है। उन्होंने कई ओलंपिक खिलाड़ियों, प्रतिष्ठित डॉक्टरों व नेताओं के साक्षात्कार किए हैं। उनका लक्ष्य पाठकों तक प्रमाणित व शोध परक जानकारी पहुंचाना है।


विशेषज्ञता
स्वास्थ्य। पर्यावरण व राजनीतिक खबरों में भी गहरी रुचि।

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