ईशा फाउंडेशन के बारे में 44 और वीडियो हटाने का आदेश

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली हाईकोर्ट ने ईशा फाउंडेशन के खिलाफ मानहानि मामले में नक्कीरन पब्लिकेशन्स के 39 छोटे वीडियो और 5 अंग्रेजी वीडियो हटाने का आदेश जारी किया है। न्यायालय ने कहा कि सभी अतिरिक्त वीडियो भी हटाए जाने चाहिए, क्योंकि वे पहले से विचार किए गए सामग्री का हिस्सा हैं।

ईशा फाउंडेशन के बारे में 44 और वीडियो हटाने का आदेश

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में तमिल मीडिया आउटलेट नक्कीरन पब्लिकेशन्स के खिलाफ मानहानि के मामले में सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन से जुड़े 39 छोटे वीडियो व पांच अंग्रेजी भाषा के वीडियो हटाने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने गूगल एलएलसी (जो यूट्यूब चलाती है), तमिल साप्ताहिक पत्रिका और उसके प्रकाशक/संपादक के खिलाफ मानहानि के मामले में ईशा फाउंडेशन के पक्ष में 19 मार्च को जारी अपने अंतरिम रोक आदेश को स्पष्ट व संशोधित किया है। पीठ ने कहा कि उसके अंतरिम आदेश में पहले से शामिल वीडियो के अलावा अतिरिक्त लिंक भी हटाए जाने चाहिए।

पीठ ने माना कि हालांकि आवेदन स्पष्टीकरण मांगने के तौर पर दिया गया, लेकिन असल में यह आदेश में बदलाव की मांग थी। हालांकि पीठ ने अपने पिछले आदेश को पूरी तरह लागू करने के लिए बदलाव को जरूरी माना है, क्योंकि अतिरिक्त वीडियो भी उसी सामग्री का हिस्सा थे, जिस पर रोक की कार्यवाही के दौरान पहले ही विचार किया गया।यह घटनाक्रम ईशा फाउंडेशन द्वारा अंतरिम आदेश पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए दायर एक नए आवेदन के बाद हुआ। बता दें 19 मार्च के अपने आदेश में पीठ ने तमिल साप्ताहिक पत्रिका व उसके संपादक को फाउंडेशन के खिलाफ मानहानि करने वाली सामग्री बनाने, प्रकाशित करने, अपलोड करने या फैलाने से रोक दिया था। रोक के आवेदन में बताए गए यूट्यूब वीडियो व लेखों को हटाने का निर्देश दिया गया था। अपने नए आवेदन में फाउंडेशन ने तर्क दिया कि हालांकि पिछले आदेश में रोक के आवेदन में बताए गए लिंक का ज़िक्र है, लेकिन उसमें गलती से शिकायत के पैराग्राफ 10 में सूचीबद्ध 39 छोटे वीडियो व पांच अंग्रेजी भाषा के वीडियो छूट गए थे।

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