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पंजाब, हरियाणा और UP की सीमाएं बदलें, HC और राजधानी भी; अर्जी पर क्या बोला उच्च न्यायालय

रिटायर्ड सरकारी अधिकारी ने अपनी याचिका में मांग की कि अदालत पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्यों की सीमाओं को बदल दें। इतना ही नहीं हाई कोर्ट के स्थान भी बदले जाएं। इस पर अदालत ने क्या कहा?

पंजाब, हरियाणा और UP की सीमाएं बदलें, HC और राजधानी भी; अर्जी पर क्या बोला उच्च न्यायालय
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 29 Feb 2024 05:01 PM
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दिल्ली हाई कोर्ट में गुरुवार को एक ऐसी याचिका आई, जिसने खूब चर्चा बटोरी। रिटायर्ड सरकारी अधिकारी ने अपनी याचिका में मांग की कि अदालत पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्यों की सीमाओं को बदल दें। इतना ही नहीं हाई कोर्ट के स्थान भी बदले जाएं। याचिका देखकर पीठ ने इसे तुरंत खारिज कर दिया और कहा कि यह काम संसद का है न कि अदालत का। पीठ ने टिप्पणी भी की कि यही सब कुछ बचा था, अब कोई हमसे भारत का नक्शा दोबारा बनाने के लिए कह रहा है। 

गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष एक शख्स ने उत्तर के तीन राज्यों की सीमाएं बदलने और हाई कोर्ट के स्थान बदलने की याचिका डाली थी। जिस पर पीठ ने अपने फैसले में कहा, “हम संसद को निर्देश जारी नहीं कर सकते। हम राज्यों की सीमाओं को नहीं पहचानते। हम यह तय नहीं करते कि किस हाई कोर्ट को कहां काम करना चाहिए। यह हमारा क्षेत्र या अधिकार क्षेत्र नहीं है।'' 

हाई कोर्ट से क्या मांग की थी
सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता जेपी सिंह ने अपनी याचिका में हाई कोर्ट से मांग की कि वे केंद्र को मेरठ कमिश्नरी का सोनीपत, फरीदाबाद और गुरुग्राम का दिल्ली के साथ और चंडीगढ़ का हरियाणा के साथ विलय करने का निर्देश दें। उन्होंने यह दावा किया कि मेरठ दिल्ली के बहुत करीब स्थित है, इसलिए ऐसा किया जाना चाहिए। यही नहीं उन्होंने पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ के बजाय हरियाणा के लिए कुरूक्षेत्र और पंजाब के लिए राजधानी जालंधर करने की मांग की।

जेपी सिंह ने अदालत से केंद्र सरकार को पंजाब और हरियाणा के लिए एक उच्च न्यायालय को विभाजित करने और अलग-अलग उच्च न्यायालय स्थापित करने का निर्देश देने का भी आग्रह किया था। याचिकाकर्ता ने मांग की कि पंजाब के लिए जालंधर में और हरियाणा के लिए कुरुक्षेत्र में उच्च न्यायालय स्थापित होने चाहिए। सिंह ने अपनी याचिका में दलील दी कि मेरठ में रहने वाले लोगों को न्यायिक/प्रशासनिक कार्यों के लिए लखनऊ और अमृतसर में रहने वाले लोगों को यात्रा करने में कठिनाई होती है। आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी ऐसे काम के लिए चंडीगढ़ आने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

मामले में विचार करते हुए, पीठ में शामिल न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता खुद को केवल उत्तर तक ही क्यों सीमित रखे हुए हैं। उन्हें भारत के अन्य हिस्सों की सीमाओं के विलय की भी मांग करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “यही सब कुछ बचा था। अब कोई हमसे भारत का नक्शा दोबारा बनाने को कह रहा है। आपने खुद को केवल उत्तर भारत तक ही सीमित क्यों रखा है?"

पीठ ने अपने फैसले में कहा, "अदालत का मानना ​​है कि याचिका भारत के संविधान के अनुच्छेद 3 की अनदेखी में तैयार की गई है और दायर की गई है।"

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