‘केंद्र बताए क्या बिना पासपोर्ट शरणार्थी को डीयू में दिया जा सकता है दाखिला’
दिल्ली उच्च न्यायालय ने म्यांमार के एक नागरिक द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के दाखिले की शर्त को चुनौती देने वाली याचिका में केंद्रीय गृह और विदेश मंत्रालय को पक्षकार बनाया है। न्यायालय ने उन्हें याचिकाकर्ता के शरणार्थी स्टेटस पर अदालत की मदद करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 20 जुलाई, 2026 को होगी।

उच्च न्यायालय ने शरणार्थी के डीयू में दाखिला मामले में केंद्रीय गृह और विदेश मंत्रालय को पक्षकार बनाया
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारत सरकार के गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को एक याचिका में पक्षकार बनाया है। यह याचिका म्यांमार के एक नागरिक ने दायर की है, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय की उस शर्त को चुनौती दी गई है, जिसके तहत अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लिए विदेशी छात्रों के पास वैध गैर-भारतीय पासपोर्ट होना जरूरी है।
अगली सुनवाई की तारीख
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने नए पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के यूएनएचसीआर मान्यता प्राप्त शरणार्थी या शरण चाहने वाले के स्टेटस पर अदालत की मदद करें। साथ ही यह भी बताएं कि अगर उसे शरण चाहने वाले के तौर पर मान्यता दी जाती है, तो क्या पासपोर्ट न होने के बावजूद उसे दिल्ली विश्विद्यालय में दाखिला दिया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई, 2026 को होगी।
याचिकाकर्ता की पृष्ठभूमि
यह याचिका शरणार्थी हेनरी हटू आंग लिन ने वकील अशोक अग्रवाल और कुमार उत्कर्ष के जरिए दायर की है। पिछली सुनवाई में पीठ ने मान्यता प्राप्त शरणार्थी के लिए पासपोर्ट की जरूरत पर दिल्ली विश्विद्यालय से सवाल किया था कि किसी शरणार्थी से पासपोर्ट की उम्मीद कैसे की जा सकती है। याचिका के अनुसार हेनरी और उनका परिवार 2022 में म्यांमार छोड़कर भाग आए थे। वह तब से भारत में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचआरसी) की सुरक्षा में रह रहे हैं।
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लेखक के बारे में
Hemlata Kaushikशॉर्ट बायो : हेमलता कौशिक पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'हिन्दुस्तान' में दिल्ली हाई कोर्ट से संबंधित खबरें करती हैं।
परिचय एवं अनुभव
हेमलता कौशिक को पत्रकारिता में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कोर्ट रिपोर्टिंग टीम का हिस्सा हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने कई ब्रेकिंग खबरें की हैं।
करियर का सफर (प्रिंट पत्रकारिता)
एचटी में उन्हें कार्य करते हुए 17 वर्ष हो गए हैं। एक वर्ष उन्होंने पंजाब केसरी में कार्य किया है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन(बीजेएमसी), एम ए राजनीति शास्त्र, कानून स्नात्तक (एलएलबी)।
विशेषज्ञता
कानूनी मामले (अदालत की रिपोर्टिंग), उपभोक्ता अधिकार संबंधी मामले, केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण(कैट नौकरी संबंधी प्रशासनिक आदेश), दिल्ली महिला आयोग के माध्यम से महिलाओं के हक की लड़ाई व मानवीय पहलु से संबंधित ज्वलंत मुद्दों पर विशेष दृष्टि, दिल्ली सरकार के मध्यस्थता केन्द्र में पारिवारिक विवादों व उनसे परिवार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों की राय पर आधारित मामलों पर विशेष ध्यान। किशोर न्याय बोर्ड में नाबालिगों के आने वाले मामलों पर उनकी मनोस्थिति व बदलती धारणा पर नजर बनाए रखना।


