अदालत से : दुष्कर्म मामले में महिला शिक्षिका की जमानत रद्द
उच्च न्यायालय ने एक शिक्षिका की जमानत रद्द कर दी है, जिसे तीन साल की बच्ची से कथित दुष्कर्म के मामले में आरोपित किया गया था। न्यायालय ने उसे तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। इससे पहले, मुख्य आरोपी स्कूल के केयरटेकर की भी जमानत रद्द की गई थी।

नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने तीन साल की बच्ची से कथित दुष्कर्म के मामले में एक शिक्षिका की जमानत रद्द कर दी। साथ ही, तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। इससे पहले 29 जून को केस के मुख्य आरोपी स्कूल के केयरटेकर की भी जमानत रद्द कर दी थी। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने बुधवार को दिल्ली पुलिस की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में शिक्षिका को जमानत के आदेश को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने 20 मई को शिक्षिका को जमानत दी थी।
शिक्षिका को कथित तौर पर घटना की जानकारी अधिकारियों से छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह घटना एक मई को सामने आई थी जब बच्ची की मां ने जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जनकपुरी इलाके के एक निजी स्कूल में केयरटेकर ने उनकी बेटी का यौन उत्पीड़न किया है।
लेखक के बारे में
Hemlata Kaushikशॉर्ट बायो : हेमलता कौशिक पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'हिन्दुस्तान' में दिल्ली हाई कोर्ट से संबंधित खबरें करती हैं।
परिचय एवं अनुभव
हेमलता कौशिक को पत्रकारिता में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कोर्ट रिपोर्टिंग टीम का हिस्सा हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने कई ब्रेकिंग खबरें की हैं।
करियर का सफर (प्रिंट पत्रकारिता)
एचटी में उन्हें कार्य करते हुए 17 वर्ष हो गए हैं। एक वर्ष उन्होंने पंजाब केसरी में कार्य किया है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन(बीजेएमसी), एम ए राजनीति शास्त्र, कानून स्नात्तक (एलएलबी)।
विशेषज्ञता
कानूनी मामले (अदालत की रिपोर्टिंग), उपभोक्ता अधिकार संबंधी मामले, केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण(कैट नौकरी संबंधी प्रशासनिक आदेश), दिल्ली महिला आयोग के माध्यम से महिलाओं के हक की लड़ाई व मानवीय पहलु से संबंधित ज्वलंत मुद्दों पर विशेष दृष्टि, दिल्ली सरकार के मध्यस्थता केन्द्र में पारिवारिक विवादों व उनसे परिवार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों की राय पर आधारित मामलों पर विशेष ध्यान। किशोर न्याय बोर्ड में नाबालिगों के आने वाले मामलों पर उनकी मनोस्थिति व बदलती धारणा पर नजर बनाए रखना।


