Delhi News: सामान्य श्रेणी से अधिक अंक पर अनारक्षित श्रेणी में दें नियुक्ति : हाईकोर्ट
Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को अनारक्षित श्रेणी के तहत पद नियुक्ति देने का आदेश दिया। व्यक्ति ने कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से परीक्षा उत्तीर्ण की थी। न्यायालय ने केंद्र सरकार का आदेश रद्द करते हुए कहा कि वह सामान्य श्रेणी के मानकों के अनुसार योग्य है।

Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार का आदेश रद्द करते हुए एक व्यक्ति को अनारक्षित श्रेणी के तहत नियुक्ति देने का निर्देश दिया। व्यक्ति का चयन कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से अवर श्रेणी लिपिक के तौर पर हुआ था। छत्तीसगढ़ में पोस्टिंग मिलने के बाद इस व्यक्ति को नोटिस प्राप्त हुआ कि उसने अन्य पिछड़ा वर्ग(ओबीसी) के तहत लाभ लिया है। जबकि वह जिस जाति से आता है वह हरियाणा राज्य में ओबीसी श्रेणी आती है। लेकिन केंद्र सरकार की आरक्षण सूची में वह शामिल नहीं है। इसलिए उसकी उम्मीदवारी रद्द की जाती है। न्यायमूर्ति सी हरीशंकर व न्यायमूर्ति विनोद कुमार की पीठ ने इस मामले को पलटते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि इस उम्मीदवार को अनारक्षित श्रेणी के तहत नियुक्ति दी जाए। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि इस व्यक्ति ने ओबीसी के तहत नियुक्ति पाई है। इस व्यक्ति की तरफ से अधिवक्ता अनिल सिंगल ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवार से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। साथ ही उसने अनारक्षित श्रेणी के लिए तय उम्र के दायरे में यह परीक्षा उर्तीण की और साक्षात्कार में सफलता पाई। लिहाजा उसे सामान्य श्रेणी के तहत नियुक्ति पाने का अधिकार है। पीठ ने केंद्र सरकार के आदेश को रद्द करते हुए उम्मीदवार को सामान्य श्रेणी के तहत नियुक्ति देने के लिए वापस भेज दिया है。
सामान्य श्रेणी के सभी मानकों पर उतरा है खरा: कैट
इससे पहले केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने भी इस व्यक्ति का पक्ष सुनने के बाद पाया था कि वह सामान्य श्रेणी में नियुक्ति पाने का हकदार है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना था कि उसने आरक्षित वर्ग में आवेदन किया था। जिसके तहत उसने लिखित शपथपत्र दिया था कि उसे ओबीसी के तहत आरक्षण पाने का अधिकार है। इस पर कैट ने कहा कि यदि उम्मीदवार सामान्य श्रेणी के तहत उपयुक्त योग्यता रखता है तो उसे आरक्षित वर्ग में ही क्यों माना जाए। कैट ने इस व्यक्ति को नियुक्ति देने को कहा था। केंद्र सरकार ने कैट के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने भी माना कि यह व्यक्ति सामान्य श्रेणी में नियुक्ति का अधिकारी है।


