शुल्क देकर दिल्ली में जीपीए पर खरीदी-बेची जा सकेगी संपत्ति

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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-मानसून सत्र में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक्ट में संशोधन करने की तैयारी, 4 फीसदी हो सकता है पंजीकरण शुल्क अमित झादिल्ली में जीपीए के माध्यम से संपत्ति की खरीद-फरोख्त को सरकार कानूनी मान्यता देने की...

 शुल्क देकर दिल्ली में जीपीए पर खरीदी-बेची जा सकेगी संपत्ति

दिल्ली में जीपीए के माध्यम से संपत्ति की खरीद-फरोख्त को सरकार कानूनी मान्यता देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अगले माह होने वाले मानसून सत्र में सरकार प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक्ट में संशोधन कर सकती है। इस संशोधन के बाद सरकार को शुल्क देकर लोग जीपीए के माध्यम से भी संपत्ति को खरीद-बेच सकेंगे। सूत्रों की माने तो यह शुल्क 4 फीसदी तक रखा जा सकता है। इस बदलाव से एक तरफ जहां सरकार को राजस्व मिलेगा तो वहीं दूसरी तरफ जीपीए पर खरीदी गई संपत्ति को कानूनी मान्यता मिल जाएगी。

जानकारी के अनुसार

जानकारी के अनुसार दिल्ली में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत केवल पास कॉलोनी, डीडीए द्वारा दी गई जमीन-फ्लैट आदि का ही रजिस्ट्री होती है। वहीं अनाधिकृत कॉलोनियों एवं जेजे क्लस्टर वाली कॉलोनियों की संपत्ति को जीपीए पर ही अधिकांश लोग खरीदते एवं बेचते हैं। सरकार ने देखा है कि कई मामलों में दस्तावेजों को केवल ‘जीपीए’ का नाम देकर नाममात्र की स्टांप ड्यूटी पर पंजीकृत करा लिया जाता है, जबकि उनके भीतर संपत्ति की बिक्री, कब्जा सौंपने और मालिकाना हक ट्रांसफर करने जैसे प्रावधान भी शामिल होते हैं। यह सीधे तौर पर स्टांप ड्यूटी की चोरी है।

दिल्ली सरकार बरत रही सख्ती

इस प्रकार की खरीद-बिक्री से दिल्ली सरकार को किसी प्रकार का राजस्व प्राप्त नहीं होता। वहीं जीपीए पर खरीद-बिक्री वाले दस्तावेज की कोई कानूनी मान्यता भी नहीं होती। जीपीए अगर पंजीकृत भी करवाए जाते हैं तो भी उसमें खरीद-बिक्री की मान्यता नहीं होती। इसके चलते दिल्ली में हजारों विवाद दोनों पक्षों में देखने को मिलते हैं। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए दिल्ली सरकार ने तय किया है कि जीपीए के माध्यम से संपत्ति की खरीद-बिक्री को कानूनी मान्यता दी जाए। सरकार द्वारा बनाए जा रहे नए नियम के तहत जीपीए पर मकान या भूमि खरीदने वाला शख्स भी 4 फीसदी शुल्क देकर सब-रजिस्ट्रार के पास उसका पंजीकरण कानूनी रूप से करवा सकेगा।

सर्कल कीमत के अनुसार देना होगा शुल्क

दिल्ली सरकार ने फिलहाल राजधानी में रक्त संबंधियों के अलावा अन्य व्यक्तियों के पक्ष में होने वाले प्रत्येक जीपीए को लेकर सख्ती की है। ऐसे जीपीए अनिवार्य रूप से जांच के लिए ‘कलेक्टर ऑफ स्टांप’ को भेजे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में अचल संपत्तियों के पंजीकरण में राजस्व की चोरी को रोकने, भू-माफियाओं और धोखाधड़ी पर लगाम लगाने और सरकारी राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कलेक्टर ऑफ स्टांप को ऐसे प्रत्येक संदर्भ पर 30 दिनों के भीतर कारण सहित तर्कसंगत लिखित आदेश पारित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सर्कल कीमत के अनुसार देना होगा शुल्क

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए नियम के तहत जीपीए पर होने वाली खरीद-बिक्री में सर्कल के अनुसार शुल्क देना होगा। वह क्षेत्र जिस श्रेणी में आता है, उसी सर्कल कीमत के अनुसार शुल्क सरकार लेगी। अगर किसी संपत्ति की सर्कल के अनुसार 20 लाख रुपये कीमत बनती है तो उस पर 80 हजार रुपये शुल्क जीपीए पंजीकृत कराने के लिए देना होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली सरकार जीपीए के माध्यम से संपत्ति की खरीद-फरोख्त को कानूनी मान्यता कब देगी?
दिल्ली सरकार अगले माह होने वाले मानसून सत्र में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक्ट में संशोधन कर सकती है।
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