स्कूली छात्रों को ऐतिहासिक स्थलों में घूमने के लिए मिलेगी बुकलेट
दिल्ली सरकार चौथी से छठी कक्षा के छात्रों के लिए एक पासपोर्ट जैसी बुकलेट लाने की योजना बना रही है। इसमें 23 ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी होगी, जहां छात्र स्टैंप इकट्ठा कर सकेंगे। यह कार्यक्रम शिक्षा विभाग के सहयोग से अगस्त के बाद शुरू होगा और इसका उद्देश्य बच्चें स्मारकों के इतिहास को रोचक तरीके से जान सकें।

नई दिल्ली। राजधानी के स्कूलों में पढ़ने वाले चौथी से छठी कक्षा के छात्र आने वाले दिनों में दिल्ली की विरासत को आसानी से समझ और जान सकते हैं। दिल्ली सरकार छात्रों के लिए विरासत को जानने व समझने के लिए पासपोर्ट जैसी एक बुकलेट लाने की योजना बना रही है। इसमें शहर के 23 ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी शामिल होगी, जिससे छात्र वहां जाने पर स्टैंप इकट्ठा कर सकेंगे और शहर के इतिहास के बारे में जान सकेंगे। दिल्ली पर्यटन विभाग यह कार्यक्रम शिक्षा विभाग के साथ मिलकर तैयार कर रहा है। जानकारी के मुताबिक इसे 15 अगस्त के बाद शुरू जा सकता है।
यह छह महीने तक चलेगा। इसका उद्देश्य बच्चों के लिए विरासत को जानने के तरीके को रोमांचक बनाना है। सिर्फ किताबों के जरिए स्मारकों को देखने के बजाय, वहां जाने और उनके इतिहास के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करना है। शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन समितियों के माध्यम से स्कूलों के जरिए बुकलेट बांटने का प्रस्ताव है।विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जो छात्र सभी 23 स्मारकों का दौरा पूरा करेंगे और जरूरी स्टैंप इकट्ठा करेंगे उन्हें पर्यटन विभाग सम्मानित भी करेगा। इस पर अभी योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस उम्र के बच्चों के लिए स्मारकों में प्रवेश निशुल्क रहता है। उन्होंने बताया कि इस बुकलेट के पहले पन्ने पर छात्र की तस्वीर और जरूरी जानकारी होगी। बाकी पन्नों में दिल्ली के स्मारकों के बारे में थोड़ी जानकारी और स्टैंप लगाने के लिए जगह होगी, जिन्हें बच्चे अपनी यात्रा के दौरान इकट्ठा कर सकते हैं।
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लेखक के बारे में
Ashish Singhशॉर्ट बायो : आशीष सिंह पिछले छह वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'हिन्दुस्तान' में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर कार्यरत हैं। वह राजनीति, शिक्षा, पर्यटन, खाद्य सुरक्षा विभाग व सामाजिक विषयों से जुड़े मुद्दों को कवर कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
आशीष सिंह को पत्रकारिता में छह वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कार्यरत हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने कई ब्रेकिंग व चर्चित खबरें की हैं। जमीनी पत्रकारिता के जरिए उन्होंने पाठकों के बीच मजबूत पकड़ बनाई है। यह सफर लगातार जारी है।
करियर का सफर (प्रिंट)
आशीष ने अपने करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की थी। इसके बाद अमर उजाला व पंजाब केसरी जैसे प्रमुख अखबारों में सेवाएं दीं। उन्हें घूमना, लिखना, पढ़ना व संगीत सुनना खूब पसंद है। खासकर यात्रा वृतांत व पर्यावरण विषय पढ़ने में उन्हें खूब रुचि है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि:
उन्होंने एमए इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन प्रिंट, बीए (ऑनर्स) इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री ली है। नदियों व पहाड़ों से लगाव के चलते उन्हें डीडब्ल्यू हिन्दी द्वारा ईको इंडिया प्रोजेक्ट के लिए ग्रांट प्राप्त है।
विशेषज्ञता
राजनीति, शिक्षा, पर्यटन, सामाजिक मुद्दे और देश-विदेश की घटनाओं को दिल्ली से जुड़े एंगल को वह कवर करते हैं। इन विषयों को वह अपने इर्द-गिर्द रोज़ाना जीते और अनुभव करते हैं। शिक्षा निदेशालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), राजनीति-(दिल्ली भाजपा),
जू अथॉरिटी, खाद्य सुरक्षा विभाग, धर्म-कर्म, पर्यटन विभाग को वह कवर करते हैं।
उन्होंने हिन्दुस्तान में रहते हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान दिल्ली का हाल, लाल किला के पास बम धमाका, गोवा अग्निकांड, नेपाल-युवा आंदोलन, ईरान में युवा आंदोलन, तुर्कमान गेट हमला और कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम को मानवीय दृष्टि से कवर किया था। यह सफर निरंतर रूप से चल रहा है। वह अपनी लेखनी को और मजबूत कर रहे हैं।
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