सजायाफ्ता बदमाश आखिरी बार पिता की सूरत नहीं देख सका
दिल्ली में साइबर ठगी के आरोपी अली मोहसिन को अपने पिता के इंतकाल पर अंतिम बार मिलना मुश्किल हुआ। पैरोल की कानूनी प्रक्रिया में देरी के कारण, उसे केवल चार घंटे की पैरोल मिली। कड़ी सुरक्षा में उसे दफन के लिए गांव लाया गया, जहां उसने अपने परिवार के साथ गम साझा किया।

दिल्ली में लाखों की साइबर ठगी के मामले में जेल में बंद मुंडाली निवासी अपराधी इंतकाल के बाद आखिरी बार अपने पिता की सूरत तक नहीं देख पाया। परिजनों ने बहुत प्रयास किए, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी न होने की वजह से आरोपी को पैराल नहीं मिली। दफीने के दो दिन बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई, तो आरोपी को मात्र चार घंटें के लिए पैरोल मिली। कड़ी सुरक्षा में दिल्ली और मुंडाली पुलिस आरोपी को लेकर गांव पहुंची। थाना मुंडाली के अनुसार अली मोहसिन निवासी गांव मुंडाली को करीब एक वर्ष पूर्व दिल्ली पुलिस ने लाखों रुपये की साइबर ठगी के आरोपों में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
कोर्ट में ट्रायल के दौरान अपराध साबित होने पर उसे सजा हो गई थी। दो दिन पूर्व अली मोहसिन के पिता अली हैदर का बीमारी के चलते इंतकाल हो गया था। ऐसे में घर के सभी लोगों की रजा थी कि मोहसिन अपने पिता के दफीने में शामिल हो। परिजनों ने इसकी सूचना भी दिल्ली पुलिस को दे दी और वर्तमान में तिहाड़ जेल में सजा काट रहे अली मोहसिन की पैरोल के लिए कोर्ट में आश्वयक दस्तावेज दाखिल किए थे परंतु कानूनी प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लग गया। जिसकी वजह से दो दिन बाद मौहसीन की गैर मौजूदगी में उसके पिता को शुक्रवार शाम को ही गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। शनिवार को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर दिल्ली पुलिस मोहसिन को मुंडाली गांव लेकर पहुंची। गांव में कड़ी सुरक्षा की गई थी। परिजनों से मिलने के बाद मोहसिन फूट फूट कर रोया और परिजनों के साथ अपना गम साजा किया। मुंडाली थाना प्रभारी देवेन्द्र कुमार मिश्र का कहना है कि मौहसीन साइबर ठगी के मामले में सजा याफ्ता है। पिता के इंतकाल के बाद चार घंटें की पैरोल पर उसे गांव लाया गया था।


