डेढ़ दशक पहले अधिग्रहित बाहरी दिल्ली के दो गांवों का मुआवजा बढ़ा, हजारों किसानों को मिलेगा लाभ
नई दिल्ली हेमलता कौशिकविकास कार्यों के लिए डेढ़ से दो दशक पहले अधिग्रहित बाहरी दिल्ली के दो गांवों की जमीन का मुआवजा अदालत ने बढ़ा दिया है। अदालत के इ

नई दिल्ली। हेमलता कौशिक विकास कार्यों के लिए डेढ़ से दो दशक पहले अधिग्रहित बाहरी दिल्ली के दो गांवों की जमीन का मुआवजा अदालत ने बढ़ा दिया है। अदालत के इस फैसले से तकरीबन 18 सौ किसान परिवारों को दूसरी बार मुआवजे की रकम विभिन्न ब्याज समेत बढ़कर मिलेगी।
मुआवजे की नई राशि
रोहिणी स्थित जिला जज सिद्धार्थ माथुर की अदालत ने पुर्ठ खुर्द गांव की जमीन का मुआवजा पांच लाख 80 हजार 792 रुपये प्रति एकड़ बढ़ाया है। वहीं प्रहलाद पुर बांगर गांव की जमीन पर चार लाख 750 रुपये प्रति एकड़ बढ़ाए गए हैं। इस आदेश के बाद किसानों को मुआवजे की अतिरिक्त रकम के भुगतान के आदेश केन्द्र सरकार व दिल्ली विकास प्राधिकरण को दिए गए हैं। इस मुआवजा रकम पर अदालत ने कई तरह के ब्याज भी लगाए हैं, जिनमें क्षतिपूर्ति ब्याज भी शामिल है। अदालत का यह आदेश दोनों गांवों के हजारों परिवारों को पुन: आर्थिक लाभ देगा। अदालत ने माना है कि संबंधित विभागों ने जमीन अधिग्रहण के समय मुआवजा रकम का आंकलन गलत तरीके से किया। जिससे किसानों को नुकसान हुआ है। इसके लिए वह अतिरिक्त मुआवजा पाने के हकदार हैं।
महत्वपूर्ण योजनाएं
इन गांवों की जमीन पर महत्पूर्ण योजना हुई पूरी
इन दोनों गांवों की जमीन के अधिग्रहण के बाद यहां सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं को अमली जामा पहनाया गया। दिल्ली की आंतरिम क्षेत्र से उघोगों को बाहर कर बाहरी दिल्ली में प्लांट लगाए गए थे। इन गांवों की जमीन पर बवाना औद्योगिक क्षेत्र, बादली औद्योगिक क्षेत्र व रोहिणी रेजिडेंसियल योजना के तहत हजारों फ्लैट्स बनाए गए हैं। अदालत ने माना कि इन औद्योगिक इकाईयों से भारी लाभ हुआ है। ऐसे में किसानों को नुकसान में नहीं रखा जा सकता।
फैसले का महत्व
इस आदेश से मिला दोहरा लाभ
अदालत के रीडर सोमबीर डागर ने फैसले पर तथ्यों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस फैसले ने एक नजीर पेश की है। दरअसल अब तक सरकार भूमि अधिग्रहण में जमीनों को ए और बी श्रेणी में रखकर मुआवजा देती रही है। लेकिन इस बार अदालत ने इस अंतर को समाप्त करते हुए केन्द्र सरकार को निर्देश दिया है कि सभी किसानों को एक समान बढ़ा हुआ मुआवजा दिया जाए। इसमें ए और बी श्रेणी को समाप्त कर दिया गया है। इससे पूर्व में बी श्रेणी के तहत कम मुआवजा पाने वाले किसानों को अब एक श्रेणी के बराबर ही मुआवजा प्राप्त होगा। अदालत का यह फैसला बीते 24 अगस्त को सुनाया गया। हालांकि न्यायाधीश की हस्ताक्षरित प्रति तीन सितंबर को उलब्ध हुई।
सरकारी पक्ष
जमीन में गड्डे का हवाला दे घटाया था मुआवजा
दअरसल प्रहलादपुर बांगर के गांव की जमीन को ए और बी श्रेणी में रखकर अलग-अलग मुआवजा रकम तय की गई थी। सरकार की तरफ से अदालत में कहा गया कि बी श्रेणी की जमीन में तीन से पांच फीट तक के गड्डे थे। इस पर अदालत ने प्रतिवादी सरकार व अन्य विभागों से इसके सबूत मांगे। लेकिन प्रतिवादी ना तो कोई तस्वीर या इन गड्डों को भरने खर्च आई रकम का ब्यौरा नहीं दे सके। अदालत ने कहा कि यह किसानों के साथ अत्याचार होगा, यदि एक ही गांव के किसानों को दो श्रेणियों में बांटकर अलग-अलग मुआवजा दिया जाए।
मुकदमे का निर्णय
एक हजार 40 मुआवजे के मुकदमों का एक साथ निपटारा
इन दो फैसलों के आधार पर अब अदालत में लंबित एक हजार 40 मुआवजा दावों का निपटारा हो गया है। ये दो फैसले सभी मामलों पर लागू होंगे। इसके अतिरिक्त जिन इन गांवों के जिन किसानों ने अभी तक मुआवजा बढ़ाने की मांग संबंधी याचिका दायर नहीं की है। वह अब भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 29 के तहत अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी लगाकर सीधा इन फैसलों का लाभ ले सकते हैं।
भूमि अधिग्रहण का इतिहास
23 साल पहले प्रहलाद पुर बांगर गांव की जमीन का हुआ था अधिग्रहण
रोहिणी रेजिडेंसियल योजना के लिए 21 मार्च 2003 को प्रहलाद पुर बांगर गांव की जमीन का अधिग्रहण हुआ था। जबकि मुआवजा राशि की घोषणा 12 जुलाई 2005 को की गई थी। वहीं पुर्ठ खुर्द गांव की जमीन अन्य विकास कार्यों के लिए 16 जनवरी 2008 को अधिग्रहित की गई थी। वहीं मुआवजा रकम की घोषणा 10 जनवरी 2011 को की गई थी। अब लम्बे समय बाद इन किसानों को फिर से मुआवजा मिलेगा।


