हाई कोर्ट ने जवाद सिद्दीकी को नहीं दी अंतरिम जमानत
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को धनशोधन मामलों में छह सप्ताह की अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया। अदालत ने सिद्दीकी को कस्टडी पैरोल पर अपनी बीमार पत्नी से मिलने की इजाजत दी, लेकिन असामान्य स्थिति न होने के कारण अंतरिम जमानत खारिज कर दी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को छह सप्ताह की अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया। सिद्दकी दो धनशोधन मामलों में हिरासत में है। हालांकि न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने सिद्दीकी को तीन तारीखों पर कस्टडी पैरोल पर अपनी पत्नी (जो स्टेज 4 ओवेरियन कैंसर की मरीज हैं) से मिलने की इजाजत दे दी। सिद्दीकी ने इस आधार पर अंतरिम जमानत मांगी कि उनकी पत्नी की सेहत बहुत खराब है। वह जिंदगी के इस पड़ाव पर उनके साथ रहना चाहते हैं। पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं था जिससे कोई आपातकालीन स्थिति दिखे। असल में मेडिकल रिकॉर्ड से पता चला कि सिद्दीकी की पत्नी की हालत बिगड़ नहीं रही है, बल्कि सुधर रही है।
कस्टडी पैरोल की इजाजत
पीठ ने आगे कहा कि सिद्दीकी के भागने का जोखिम हो सकता है। अगर उसे रिहा किया गया तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकता है या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर सकते हैं। पीठ ने आरोपी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, उसे 21 जुलाई, 23 जुलाई व 25 जुलाई को कस्टडी पैरोल पर अपनी पत्नी से मिलने की इजाजत दी। पीठ ने जेल सुपरिटेंडेंट को कस्टडी पैरोल के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने व यह पक्का करने का निर्देश दिया कि वह 21, 23 और 25 जुलाई को सुबह 10:00 बजे से शाम 04:00 बजे के बीच बताए गए पते पर अपनी बीमार पत्नी से मिल सके। पीठ ने साफ किया कि इस दौरान उसे सिर्फ अपनी पत्नी से मिलने की इजाजत होगी, और किसी और से नहीं। कस्टडी पैरोल का मतलब है कि कैदी को हथियारबंद पुलिस वाले मिलने की जगह तक ले जाते हैं।
यूनिवर्सिटी की आय
यूनिवर्सिटी ने 2018 व 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये कमाए
सिद्दकी को 18 नवंबर 2025 को धनशोधन रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था। ईडी की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की दो प्राथमिकी से शुरू हुई, जिसमें आरोप लगाया गया कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने छात्र व परिजनों को गुमराह करने के लिए एनएएसी एक्रेडिटेशन व यूजीसी रिकग्निशन को गलत तरीके से दिखाया। ईडी ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी ने 2018 व 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये कमाए। छात्रों से इकट्ठा किए गए फंड को निजी इस्तेमाल के लिए डायवर्ट कर दिया गया। ईडी ने वहीं दूसरी प्राथमिकी एक जमीन को लेकर 45 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा है।
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