सरकार चाहती तो रिहाई हो सकती थी : चिन्मय दास के वकील
बांग्लादेश के प्रमुख संत चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई में देरी के लिए वकील ने राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को जिम्मेदार ठहराया है। उनके खिलाफ छह मामले दर्ज होने की वजह से जमानत मिलने के बावजूद वे जेल में बने रहे। पहले मामले में उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उनके खिलाफ नए मामले दर्ज किए गए।

- रिहाई में देरी के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी को जिम्मेदार ठहराया ढाका, एजेंसी। बांग्लादेश के प्रमुख संत चिन्मय कृष्ण दास के वकील ने उनकी रिहाई में हो रही देरी के लिए सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार जमानत मिलने के बाद नए मामले दर्ज कर उन्हें जेल में रखने की कोशिश की गई।चिन्मय कृष्ण दास के बचाव पक्ष के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि अगर सरकार वास्तव में चाहती तो बहुत कुछ संभव हो सकता था, लेकिन मामले को जानबूझकर धीमी प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि चिन्मय दास के खिलाफ कुल छह मामले दर्ज किए गए हैं। पहला मामला 24, अक्तूबर 2024 को राजद्रोह का दर्ज हुआ था। आरोप था कि उन्होंने एक रैली के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया। इसके बाद 25 नवंबर, 2024 को रंगपुर से चटगांव जाते समय ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद पूरे बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन हुए और 27 नवंबर, 2024 को चटगांव अदालत परिसर के बाहर उनके समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें भी हुई थीं। भट्टाचार्य ने कहा कि राजद्रोह मामले में 4 मई, 2025 को हाईकोर्ट ने चिन्मय दास को जमानत दे दी थी, लेकिन जमानत मिलने के महज दो दिन बाद उनके खिलाफ पांच नए मामले दर्ज कर दिए गए और उन्हें उन मामलों में भी गिरफ्तार दिखा दिया गया।


