प्रदेश में पहले डिग्रियां बेची जाती थीं, डिजीलॉकर से लगी लगाम : राज्यपाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रदेश में पहले डिग्रियां बेची जाती थीं। अंकतालिका में नाम बदल दिया जाता था। अब डिजीलॉकर से ऐसे सभी अपराध व भ्रष्टाचार पर लगाम लग गई है।

kanpur News: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रदेश में पहले डिग्रियां बेची जाती थीं। अंकतालिका में नाम बदल दिया जाता था। अब डिजीलॉकर से ऐसे सभी अपराध व भ्रष्टाचार पर लगाम लग गई है। डिजीलॉकर पर अपलोड की जाने वाली अंकतालिका व डिग्री को सौ फीसदी डाउनलोड कराने के लिए छात्रों को जागरूक करें। राज्यपाल ने मेधावियों को बधाई देने संग देश के विकास के लिए वैज्ञानिकों की तकनीक और किसानों के अनुभव के समन्वय को जरूरी बताया। राज्यपाल ने विवि की खामियों को भी गिनाया और उसे अगले दो माह में निस्तारित करने का निर्देश दिया। कहा, दो माह बाद फिर आऊंगी, कोई कमी नहीं मिलनी चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के 28वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भारत की आत्मा गांव हैं और गांव की आत्मा किसान हैं। इसलिए किसानों को समृद्ध करना आवश्यक है। हालांकि किसान अब हल तक सीमित रहने के बजाए ड्रोन तक पहुंच गया है। विवि में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। समितियां बनाएं और जिम्मेदारी सौंपे। सिर्फ दो घंटे पढ़ाने से ड्यूटी पूरी नहीं होती है। खुद कुलपति, वित्त नियंत्रक, रजिस्ट्रार भी सप्ताह में एक दिन सफाई करें।
काम तो करना होगा, नहीं तो राजीनामा ले लेती हूं
राज्यपाल ने सख्त लहजे में कहा कि कुलपति हो या फिर रजिस्ट्रार और वित्त नियंत्रक। काम सभी को करना होगा। अन्यथा राजीनामा ले लेती हूं। अगर काम नहीं करना है तो कुलपति, रजिस्ट्रार और वित्त नियंत्रक न बनो। पिछली घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कुलपति की विदाई के बाद नया कुलपति नहीं बनाया और न ही किसी दूसरे कुलपति को कार्यभार सौंपा। यह जिम्मेदारी कमिश्नर को दी। क्योंकि विवि की कई खामियां कमिश्नर ही दूर कर सकते थे और उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर उसका समाधान भी कराया। राज्यपाल ने सभी विवि को उन विभूतियों के नाम पर कॅम्प्टीशन कराने का निर्देश दिया, जिनके नाम पर विवि का नाम रखा गया है।
सीएसजेएमयू का अत्याधुनिक फायर सिस्टम देखकर आओ
राज्यपाल ने सीएसए विवि में लगे अधिकतर फायर उपकरण एक्सपायरी होने पर नाराजगी जताई। कहा, लखनऊ में 15 बच्चों की मौत के बाद भी नहीं जागे हो। उन्होंने कहा कि छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में अत्याधुनिक फायर सिस्टम लगा है। उसे देखकर आओ और कोशिश करो कि ऐसा सिस्टम लगे। अगर नहीं होता है तो जो है, उसी में सुधार करो।
राज्यपाल ने अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल
राज्यपाल ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। कहा, एक विवि को 2600 कुंतल बीज उत्पादन का लक्ष्य दिया। विवि ने जब गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन कर लिया तो उन्होंने लेने के बजाए प्राइवेट कंपनी से खरीद लिया। इससे विवि को करीब ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जिसका खामियाजा किसानों ने भी भुगता। राज्यपाल ने इटावा के इंजीनियरिंग कॉलेज में विकसित की जा रही सस्ती, आसान व प्रभावी यंत्रों की प्रशंसा की। कहा, अभी एक शिक्षक ने बताया कि और यंत्र भी विकसित किए गए हैं, लेकिन इन वैज्ञानिकों के यंत्रों को खरीदने के बजाए बाहर से खरीद लेते हैं। कई भवन अधूरे पड़े हैं, इसके पीछे या तो डिजाइन गड़बड़ है या फिर भ्रष्टाचार है।
पुस्तकालय में बाहरी छात्रों का कब्जा रहता है
राज्यपाल ने कहा कि पुस्तकालय में वर्तमान छात्रों को बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिलती। वहां, बाहरी छात्रों का कब्जा रहता है। इसे तुरंत सुधारें। कुलपति के नए पुस्तकालय के लिए मिले 3.5 करोड़ रुपये को लेकर भी राज्यपाल ने तंज कसा। कहा, देखती हूं कैसी लाइब्रेरी बनवाते हो।
मंत्री जी पूछ रहे थे कि ईंट क्यों लगाया है
राज्यपाल ने पिछले दीक्षांत का जिक्र किया और कहा कि हॉस्टल का निरीक्षण किया था। तब मंत्री साथ में थे। एक कमरे में छात्राएं बैठी थीं और दरवाजा नहीं खुल रहा था। दरवाजे के पीछे ईंट लगाए गए थे। क्योंकि, दरवाजा टूटा था। तब मंत्री जी पूछ रहे थे कि ईंट क्यों लगाया है। अरे भाई सुरक्षा को देखते हुए छात्राओं ने इंतजाम किया था। इसके बावजूद दरवाजा ठीक करने के बारे में किसी ने नहीं सोचा।
इलाज करना तो दूर ठीक से बात कर लें डॉक्टर साहब
राज्यपाल ने सबसे अधिक नाराजगी मेडिकल सुविधा को लेकर जताई। कहा, कैम्पस में बने मेडिकल सेंटर में तैनात डॉ. एसके सिंह इलाज या दवा तो दूर मरीज से ढंग से बात ही कर लें।
हरदोई कॉलेज की जीरो परफॉर्मेंस पर उठाए सवाल
राज्यपाल ने पदकों को लेकर हरदोई कॉलेज पर सवाल उठाया। कहा, मेडल में संख्या जीरो है, इसका कारण बताओ। मंच पर बैठे कुलपति, रजिस्ट्रार के अलावा डीन हरदोई भी मूक बने बैठे रहे। किसी ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया।
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लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
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पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


