हिंद महासागर क्षेत्र पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण : राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर क्षेत्र की बढ़ती चुनौतियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है, जहां बाहरी शक्तियों की मौजूदगी बढ़ रही है। नौसेना के अधिकारियों से बात करते हुए उन्होंने नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और आईएनएस महेंद्रगिरि का कमीशनिंग महत्व बताया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बाहरी शक्तियों की मौजूदगी बढ़ रही है और यहां नई रणनीतिक प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। यह हमारे अपने आंगन की तरह है और इसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह बात आईएनएस महेंद्रगिरि के कमीशनिंग समारोह से एक दिन पहले विशाखापत्तनम में नौसेना के अधिकारियों और जवानों से मुलाकात के दौरान kahi.
हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा
इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। देश के 90 प्रतिशत व्यापार का परिवहन समुद्री मार्गों से होता है और तेल-गैस सहित ऊर्जा आपूर्ति भी इन्हीं रास्तों से आती है।
नई तकनीकों को सीखने की आवश्यकता
रक्षा मंत्री ने नौसेना के अधिकारियों और जवानों से बदलते युद्ध स्वरूप के अनुरूप नई तकनीकों को सीखने और अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में रक्षा क्षेत्र की चुनौतियां और जटिल होंगी। युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कई देश हमारे पड़ोस में अपना प्रभाव बढ़ाने और मजबूत उपस्थिति स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत इस क्षेत्र की सबसे बड़ी शक्ति होने के साथ-साथ शांति और स्थिरता का सबसे बड़ा संरक्षक भी है।
आईएनएस महेंद्रगिरि का कमीशनिंग
राजनाथ ने कहा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है और आईएनएस महेंद्रगिरि का कमीशनिंग इसका प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि आंध्र प्रदेश रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण का नया केंद्र बनकर उभर रहा है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता और मजबूत होगी।
आज नौसेना में शामिल होगा ‘महेंद्रगिरि’:
स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ शनिवार को विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होगा। यह ‘प्रोजेक्ट 17ए’ का छठा और अंतिम युद्धपोत है। पूर्वी घाट की खूबसूरत पहाड़ियों के नाम पर बने ‘आईएनएस महेंद्रगिरि’ को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इस जंगी जहाज को बनाने में 75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामान और तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। इस फ्रिगेट की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टील्थ तकनीक है, जिसकी वजह से दुश्मन के रडार, थर्मल या इंफ्रारेड सेंसर इसे आसानी से नहीं पकड़ पाएंगे। यानी यह समंदर में छिपकर दुश्मन पर वार करने में माहिर है।


