स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर दुनिया का भरोसा बढ़ा : राजनाथ
- रक्षा मंत्री ने कहा, परंपरा-प्रौद्योगिकी सबसे बड़ी ताकत - रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38

नई दिल्ली, एजेंसी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद स्वदेशी रक्षा प्रणालियों (मेड इन इंडिया डिफेंस प्लेटफॉर्म) पर दुनिया का भरोसा और बढ़ा है। भारतीय रक्षा उपकरणों की विश्वसनीयता और क्षमता को नई पहचान मिली है।
रक्षा उत्पादन में वृद्धि
रक्षा मंत्री ने एक निजी कार्यक्रम में कहा कि आज भारत का रक्षा उत्पादन भी बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। आठ-नौ वर्ष पहले यह 46 हजार करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा, रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि मेक इन इंडिया पहलों में विश्व के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। रक्षा निर्यात आज रिकॉर्ड 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जबकि 2013-14 में यह केवल 686 करोड़ रुपये था। रक्षा निर्यात में करीब 57 गुना की वृद्धि हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही यह आंकड़ा 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।
तकनीकी विकास और परंपराएँ
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने अभाव से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण यात्रा पूरी की। उन्होंने कहा कि भारत तकनीकी विकास के साथ-साथ अपनी परंपराओं को भी समान महत्व देता है और परंपरा तथा प्रौद्योगिकी का संगम ही 21वीं सदी में देश की सबसे बड़ी ताकत है।
ग्लोबल प्रतिष्ठा में बदलाव
राजनाथ ने कहा, भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में एक परिवर्तनकारी बदलाव आया है। आज दुनिया वैश्विक मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को ध्यान से सुनती है। उन्होंने कहा कि 2021 में शुरू किए गए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन पर शुरुआती संदेह के बावजूद, ‘प्लग-एंड-प्ले’ बुनियादी ढांचा मॉडल पर आधारित सेमीकंडक्टर पार्कों की स्थापना के कारण देश ने पिछले साल अपने स्वयं के सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन किया।
एआई का प्रभाव
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर रक्षा मंत्री ने कहा कि एआई आज जीवन के लगभग हर क्षेत्र में पहुंच चुका है, लेकिन इसकी एक कमी यह है कि वह लोगों की भावनाओं को महसूस नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता भी एआई से प्रभावित हुई है, लेकिन मानवीय रचनात्मकता और बौद्धिक क्षमता का कोई विकल्प नहीं है। भविष्य की पत्रकारिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह एआई की दक्षता और मानवीय संवेदनशीलता के बीच कितना बेहतर संतुलन स्थापित कर पाती है। एआई पत्रकारिता को अधिक तेज और सटीक बनाएगा, जबकि भावनात्मक बुद्धिमत्ता उसे मानवीय और विश्वसनीय बनाए रखेगी। रक्षा मंत्री ने फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं के दौर में पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज चुनौती सूचना की कमी नहीं, बल्कि उसकी सटीकता और विश्वसनीयता है। गलत सूचना समाज के साथ-साथ सशस्त्र बलों के मनोबल को भी प्रभावित करती है।


