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21 जनवरी, 2020|5:03|IST

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हिंदी भाषा नहीं, हमारी जीवन शैली है - दीप्ति मिश्र

dipti mishra

हिंदी दिवस के अवसर लाइव हिन्दुस्तान से खास बातचीत में मशहूर कवयित्री दीप्ति मिश्र ने हिंदी को देश की जीवनशैली बताया। दरअसल शनिवार को हिन्दुस्तान अखबार ने दिल्ली के वसंत कुंज में कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें दीप्ति मिश्र समेत मशहूर शायर वसीम बरेलवी, अशोक चक्रधर, कविता किरण, शकील जमाली और लक्ष्मी शंकर वाजपेयी भी शामिल हुए। कवि सम्मेलन से इतर दीप्ति ने हिंदी भाषा पर अपने विचार व्यक्त किए।

कवयित्री और कलाकार दीप्ति ने कहा, 'हिंदी को कुछ पंक्तियों या शब्दों में नहीं समेटा जा सकता है। हम अपने आप को हिंदी के जरिए ही अभिव्यक्त करते हैं। यह हमारे हर पल में बसी हुई है। हम हिंदी को ही जी रहे हैं।'

उन्होंने किताब और इंटरनेट का जिक्र करते हुए कहा,'किताबों की अपनी एक अलग अहमियत है, जो कि कभी कम न होगी। पन्नों को छूकर उन्हें पलटने का अलग ही मजा है। वहीं जो इंटरनेट का युजर है वो कम समय में ज्यादा जानकारी जुटाना चाहता है, जो कि गलत नहीं है।'

 

दीप्ती मिश्र ने ग्रामिण परिवेश की लड़कियों और महिलाओं के लिए कहा, 'कोई भी बंदिश तभी होती है जब आप उन्हें मानते हैं। किसी जंजीर से बंधना दो तरह का होता है। एक तो आप वाकई जंजीरों से बंधे होते हैं और दूसरा समाज की जंजीर होती है, जिसमें आप जकड़े होते हैं। इन सबसे पहले हमें अपने अंदर की जंजीर को तोड़ने की जरूरत है, जिससे हम ज्ञान हासिल कर सकें।'

उन्होंने लिखने का जिक्र करते हुए कहा, 'शब्द और भाव एक दूसरे के पूरक हैं। अगर शब्द नहीं हैं तो भाव जाहिर नहीं किए जा सकेंगे और अगर भाव नहीं हैं तो शब्द निर्थक हैं। लिहाजा शब्द ज्ञान बेहद जरूरी है।'

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  • Web Title:Deepti Mishra interview Kavita Kavi Sammelan hindi diwas