चलते-चलते::चार दशक बाद समुद्र के नीचे बना नया अंडरवाटर स्टेशन
ब्रिटेन की कंपनी डीईईपी ने फ्लोरिडा के समुद्र में 'वैनगार्ड' नाम का नया अंडरवाटर स्टेशन स्थापित किया है। 1986 में बना 'एक्वेरियस रीफ बेस' अब तक का एकमात्र चालू अंडरवाटर लैब था। यह स्टेशन समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के अध्ययन और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए बनाया गया है।

ब्रिटेन की कंपनी डीईईपी ने 'वैनगार्ड' नाम का एक नया सब-सी हैबिटेट फ्लोरिडा के समुद्र तल पर स्थापित किया है। 1986 में बना 'एक्वेरियस रीफ बेस' अब तक दुनिया की एकमात्र चालू अंडरवाटर लैब और हैबिटेट थी।
वाशिंगटन, एजेंसी।
फ्लोरिडा के समुद्र में 'वैनगार्ड' नाम का नया अंडरवाटर स्टेशन स्थापित किया गया है।
तैनाती का इतिहास
अमेरिका के समुद्री क्षेत्र में 40 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद तैनात किया जाने वाला यह पहला स्टेशन है। इससे पहले 1986 में 'एकवारियस' स्टेशन बनाया गया था। ब्रिटेन की कंपनी डीईईपी द्वारा स्थापित इस स्टेशन का इस्तेमाल आसपास की कोरल रीफ और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के अध्ययन के लिए किया जाएगा।
सात दिनों तक रह सकेंगे
वैनगार्ड को समुद्र की सतह से 56 फीट नीचे स्थापित किया गया है। 35 फीट लंबे और 8 फीट चौड़े इस स्टेशन में 4 समुद्री शोधकर्ता पांच से सात दिनों तक रह सकते हैं। यह स्टेशन आधुनिक तकनीक से लैस है और इसमें अपशिष्ट को इकट्ठा कर सतह पर रीसाइकिल करने की आधुनिक तकनीक मौजूद है।
वैज्ञानिकों के लिए क्यों है खास?
समुद्र की गहराई में रहकर रिसर्च करने से वैज्ञानिकों का समय बचता है। आम स्कूबा डाइविंग की तुलना में गहराई में रहकर काम करने से एक महीने का शोध कार्य एक हफ्ते से भी कम समय में पूरा किया जा सकता है।
अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग भी होगी
यह स्टेशन अगले पांच वर्षों तक समुद्र में रहेगा, जहां इसका मुख्य कार्य तापमान बढ़ने और ब्लीचिंग से नुकसान झेल रही 'कोरल रीफ' की निगरानी करना और उन्हें पुनर्जीवित करना है। फ्लोरिडा सरकार ने इसके लिए 935000 डॉलर का फंड दिया है। मरीन साइंटिस्ट्स के अलावा, इसका उपयोग अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग और नौसेना के लिए भी किया जाएगा। डीईईपी कंपनी की योजना भविष्य में और बड़े मॉड्यूलर स्टेशन बनाने की है, जो 650 फीट की गहराई में 6 लोगों को एक महीने तक रख सकेंगे।


