जेल में विराज विचलित, अभी दो ट्रायल बाकी नहीं होगा कहीं शिफ्ट
जिला कारागार में एक बच्चे की हत्या के मामले में विराज को फांसी की सजा सुनाई गई। सजा के बाद वह पूरी रात चिंता में रहा और किसी से बात नहीं की। वह हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार रखता है। उसके खिलाफ दो अन्य मामले भी चल रहे हैं, जिनकी सुनवाई फिरोजाबाद जिला जज के कोर्ट में होगी।

जिला कारागार में बच्चे की हत्या में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद शुक्रवार को सारी रात विराज विचलित रहा। उसको रात को नींद नहीं आई। अपनी बैरक के साथी बंदियों से भी कोई बात नहीं की। खाना भी नहीं खाया। शनिवार को भी किसी से बात नहीं की। विराज से उसके परिवार का कोई सदस्य भी जेल में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मिलने नहीं आया। अब जेल के माध्यम से या स्वयं द्वारा वह हाईकोर्ट में अपनी अपील करेगा। विराज को फिरोजाबाद के जिला कारागार में ही रखा जाएगा। उसको सेंट्रल जेल में शिफ्ट किए जाने या फिर फांसी लगने की कयासें चल रही हैं वह गलत हैं।
सबसे पहले विराज को अभी हाईकोर्ट में अपील करने की छूट है। 30 दिन के अंदर वह अपनी मृत्युदंड की सजा को लेकर अपील कर सकेगा। इसके बाद अगर हाईकोर्ट से भी उसको सजा पर राहत नहीं मिलती है वह सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील करेगा। सुप्रीम कोर्ट से भी राहत न मिली तो वह मर्जी अपील राष्ट्रपति के यहां कर सकेगा। जब तक उसकी सजा की पूरी सुनवाई नहीं हो जाती तब तक वह सामान्य तरीके से बंदियों के बीच ही रहेगा।इसके अलावा विराज के ऊपर दो अंडर ट्राइल के मामले चल रहे हैं। इसको लेकर दो वारंट हैं जिनकी सुनवाई भी फिरोजाबाद के जिला जज के कोर्ट में ही होगी। पहला बीएनएस की धारा 109 के तहत पुलिस पर मुठभेड़ के दौरान हुई फायरिंग में हत्या का प्रयास का मामला चल रहा है। दूसरा बीएनएस 3/25 के तहत उससे बरामद तमंचा को लेकर आर्मस एक्ट के वारंट पर भी सुनवाई होगी। इन दोनों सुनवाई को लेकर वह फिरोजाबाद जेल में ही रहेगा।


