बेटी ने तोड़ी बेड़ी,पिता को मुखाग्नि दे निभाया फर्ज
पंजवारा(बांका),निज प्रतिनिधिपंजवारा(बांका),निज प्रतिनिधि बेटियां अब बोझ नहीं है। बेटों से कम नहीं है। जीवन के हर क्षेत्र में बेटियों के इस बढ़ते कदम ने कई

पंजवारा(बांका),निज प्रतिनिधि। बेटियां अब बोझ नहीं है। बेटों से कम नहीं है। जीवन के हर क्षेत्र में बेटियों के इस बढ़ते कदम ने कई मामलों में यह साबित कर दिखाया है। अब तो बेटियां पिता के अर्थी को कंधा देकर शमशान तक साथ दे रही है।
समाज में बदलाव
समाज में आज भी कई जगहों पर वंश आगे बढ़ाने और अंतिम संस्कार के लिए पुत्र की चाह रखने वालों की कमी नहीं है, लेकिन समय के साथ सोच बदल रही है। आज बेटियां हर क्षेत्र में बेटों से आगे हैं और कर्तव्य निभाने के मामले में भी उन्होंने साबित कर दिया है कि वे किसी से पीछे नहीं हैं। अब लोगों के मन से यह पुरानी लालसा और भ्रम धीरे-धीरे खत्म हो रहा है कि वंश केवल पुत्र से ही आगे बढ़ता है या मुखाग्नि सिर्फ बेटा ही दे सकता है।
आर्या मिश्रा का साहस
पंजवारा ब्राह्मण टोला निवासी कृष्ण कुमार मिश्रा के निधन के बाद उनकी बड़ी पुत्री आर्या मिश्रा ने बेटे का फर्ज निभाकर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की है। बिलासपुर (कोरबा) में कार्यरत रहे स्व. कृष्ण कुमार मिश्रा की दो पुत्रियाँ हैं। आर्या मिश्रा (उम्र 20 वर्ष, जो एक सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत हैं) और छोटी पुत्री अपर्णा मिश्रा। पिता के अचानक निधन के उपरांत परिजनों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में पंजवारा स्थित चीर नदी तट पर रविवार शाम उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, जहाँ बड़ी पुत्री आर्या ने नम आँखों से पिता को मुखाग्नि दी। इस हृदय विदारक घटना ने वहाँ मौजूद हर शख्स की आँखें नम कर दीं, वहीं पुत्री के इस साहस और कर्तव्यनिष्ठा की हर तरफ सराहना हो रही है।


