कच्छ के खजूर से मालामाल होंगे प्रयागराज के किसान
प्रयागराज के शुष्क इलाके में खजूर की बागवानी को बढ़ावा दिया जा रहा है। कच्छ की बरही प्रजाति के 200 पौधे पहले चरण में रोपे जाएंगे। उद्यान विभाग द्वारा किसानों को अनुदान दिया जा रहा है। इस प्रजाति का फल कच्चा और पीला अवस्था में भी खाया जा सकता है।

प्रयागराज। जिले के शुष्क और पठारी इलाके के किसानों के लिए खजूर की बागवानी नई आमदनी का जरिया बन सकती है। गुजरात के कच्छ की बरही प्रजाति की खजूर की बागवानी की शुरुआत पाठा क्षेत्र में की जा रही है। पहले चरण में 200 पौधे रोपे जाएंगे। उद्यान विभाग की ओर से किसानों को बागवानी के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है। जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम के अनुसार प्रयागराज का शंकरगढ़ और पाठा क्षेत्र खजूर की बागवानी के लिए अनुकूल पाया गया है।
जलवायु और तिथि
यहां की शुष्क जलवायु और कम वर्षा वाली स्थिति खजूर के पौधों के लिए मुफीद है। सितंबर में पौधों का रोपण किया जाएगा। करीब तीन वर्ष बाद इनमें फल आना शुरू होने की उम्मीद है।
फल का सेवन
पीले रंग में भी खाया जाता है फल बरही प्रजाति की खासियत यह है कि इसे कच्चे और पीले रंग की अवस्था में भी खाया जा सकता है। इस अवस्था में फल कुरकुरा, मीठा और स्वादिष्ट होता है। पूरी तरह पकने पर इसका गूदा नरम और रसीला हो जाता है। जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में इसकी तुड़ाई हो जाती है, जिससे मानसून की बारिश से पहले फल बाजार में पहुंचाया जा सकता है।
उत्पादन क्षमता
एक पेड़ से 100 से 150 किलो फल वयस्क पेड़ से सालाना औसतन 100 से 150 किलोग्राम तक फल मिलने की संभावना है। इसे छुहारा या पिंड खजूर बनाने के बजाय ताजे फल के रूप में बाजार में बेचा जा सकता है। इससे प्रसंस्करण की लागत और समय भी बचता है।
अनुदान की जानकारी
खजूर की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से अनुदान दिया जा रहा है। अधिकारी के अनुसार प्रति हेक्टेयर करीब चार लाख रुपये की इनपुट लागत मानते हुए किसानों को 40 फीसदी तक, करीब 1.60 लाख रुपये का अनुदान मिल सकता है। टिशू कल्चर से तैयार पौधों पर ही अनुदान देय है।


