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Cyclone Vayu: चक्रवाती तूफान 'वायु' के रास्ता बदलने के बावजूद हाई अलर्ट पर गुजरात; 10 खास बातें

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Cyclone Vayu: मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि चक्रवात 'वायु' के रास्ता बदल लेने और इसके गुजरात तट से टकराने की संभावना नहीं होने के बावजूद इस राज्य के तटीय क्षेत्रों के लिए तूफान की गंभीरता एक खतरा बनी हुई है। अधिकारी ने कहा, 'तेज हवाओं, धूल भरी आंधी और बारिश का खतरा जस का तस बना हुआ है। चक्रवात की 'आंख के रूप में जाना जाने वाला तूफान का मध्य भाग गुजरात तट से थोड़ा दूर हो गया है, लेकिन इसका व्यास 900 किलोमीटर से अधिक का है।' मौसम विभाग के अधिकारी ने कहा कि पूर्व में चक्रवात गुजरात तट की तरफ सीधा बढ़ रहा था, लेकिन अब यह गुजरात तट से थोड़ा दूर हो गया है। उन्होंने कहा, 'लेकिन गुजरात तट के लिए जारी हाई अलर्ट की स्थिति से इसके (चक्रवात) फैलाव के चलते कोई राहत नहीं है। चक्रवाती तूफान गुजरात के पोरबंदर और कच्छ क्षेत्र तक अन्य हिस्सों से टकराने जा रहा है।' अधिकारी ने कहा कि मौसम विज्ञान विभाग चक्रवात के बारे में अपराह्न तक और जानकारी अद्यतन करेगा। पूर्व में गुजरात की तरफ बढ़ता हुआ चक्रवात महाराष्ट्र के मुंबई, रायगढ़, ठाणे और पालघर जिलों के लिए कुछ राहत की बारिश लेकर आया। (LIVE UPDATES)

पढ़ें, Cyclone Vayu 10 Points:

1- चक्रवाती तूफान 'वायु' के गुरुवार को गुजरात तट पर टकराने की संभावना के बीच नौसेना ने खुद को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा है। बयान के अनुसार, पश्चिमी नौसेना कमान मुंबई मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) के साथ तैयार है और राहत सामग्रियों को पहले से ही निर्दिष्ट जहाजों पर चढ़ा दिया गया है, जिसे कम समय पर भी मुहैया कराया जा सकता है।

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2- पश्चिम रेलवे ने बुधवार को बताया कि चक्रवात वायु के चलते आने वाली संभावित आपदा को देखते हुये रेलवे ने 70 ट्रेनों को रद्द कर दिया और 28 ट्रेनों को गंतव्य से पहले ही रोकने का फैसला किया है। पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता रवींद्र भाखर ने यह जानकरी दी। 

3- महाराष्ट्र के सिंधदुर्ग जिले की मालवन तहसील के देवबाग गांव में बुधवार को भारी समुद्री लहरों ने तबाही मचा दी। जिला कलेक्ट्रेट के एक अधिकारी ने बताया कि देवबाग के निचले इलाके में स्थित रहने के कारण यह अक्सर समुद्र में लहर उठने पर जलमग्न हो जाता है। अभी तक स्थिति नियंत्रण में है। 

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4- गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि चक्रवात वायु से उत्पन्न खतरे को देखते हुये निचले इलाकों से करीब 3.10 लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेज दिया गया है और राहत एवं बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की 52 टीमों को तैनात कर दिया गया है। 

5- चक्रवात वायु के 'बेहद गंभीर की श्रेणी में आने के कारण गुजरात के दस जिलों में अलर्ट घोषित कर दिया गया है और गुरूवार को तट से टकराने के 24 घंटे बाद तक इसका असर बने रहने की आशंका है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 45 सदस्यों वाले राहत दल की करीब 52 टीमें गठित की गई हैं और सेना की दस टुकड़ियों को तैयार रखा गया है।

6- गुजरात तट के नजदीक स्थित सभी बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर चक्रवात 'वायु को देखते हुए ऐहतियात के तौर पर कामकाज अस्थायी तौर पर रोक दिया गया है। यह जानकारी बुधवार को राज्य सरकार की ओर से दी गई। पश्चिम रेलवे ने भी घोषणा की है कि बुधवार को शाम छह बजे से तटवर्ती क्षेत्रों से गुजरने वाली सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं या उनके मार्ग छोटे कर दिये गए हैं।

7- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को लोगों को सुरक्षित रहने के लिए स्थानीय एजेंसियों द्वारा मुहैया कराई जा रही जानकारी का अनुसरण करते रहने के लिए कहा है। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा है, ''चक्रवात वायु से प्रभावित होने वाले सभी लोगों की सुरक्षा और हित के लिए प्रार्थना करता हूं। सरकार और स्थानीय एजेंसी जानकारी मुहैया करा रही हैं, जिसका मैं प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों से अनुसरण करने का अनुरोध करता हूं।''

8- चक्रवात 'वायु के गुजरात तट की ओर बढ़ने के मद्देनजर ओडिशा सरकार ने गुजरात सरकार को हर तरह की मदद की बुधवार को पेशकश की है जिसने चक्रवात को देखते हुए सौराष्ट्र और कच्छ के निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है।

9- ओडिशा के समुद्र तट पर मई के प्रथम सप्ताह में 'फेनी' के कहर के बाद वायु एक माह के अंदर भारत में तबाही लाने वाला दूसरा चक्रवात है। फेनी का असर ओडिशा के तटीय जिलों में रहने वाले करीब 1 लाख 64 हजार परिवारों के पांच लाख लोगों पर पड़ा था। इनमें काफी लोग अभी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इससे पहले 2013 में 4 अक्तूबर को ओडिशा में 'फेलिन' ने कहर ढाया था। 

10- तकरीबन दस दिन की देरी से चल रहे मानसून पर वायु तूफान का बुरा असर पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार तूफान से कुछ राज्यों में अगले दो-तीन दिन भले ही अच्छी बारिश हो लेकिन इसके दुष्प्रभाव से उत्तर भारत में मानसून का इंतजार बढ़ सकता है।

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