बिना सिबिल चेक लोन देने वाले ज्यादातर एप निकले फर्जी

हिन्दुस्तान, जमशेदपुर
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जमशेदपुर साइबर पुलिस ने फर्जी लोन एप के माध्यम से लोगों की निजी जानकारी चोरी करने का खुलासा किया है। जांच में पाया गया कि ये एप बिना सिबिल स्कोर जांचे लोन देने का दावा करते थे और वैज्ञानिक संस्थाओं से जुड़े नहीं थे। पुलिस ने सावधानी रखने की सलाह दी है।

बिना सिबिल चेक लोन देने वाले ज्यादातर एप निकले फर्जी

जमशेदपुर, संवाददाता। बिना सिबिल स्कोर जांचे तत्काल लोन देने का दावा करने वाले मोबाइल एप के झांसे में आकर लोग अपनी निजी जानकारी गंवा रहे हैं। जमशेदपुर साइबर पुलिस की जांच में ऐसे ज्यादातर एप फर्जी पाए गए हैं। पुलिस के पास पहुंची 24 शिकायतों की जांच के दौरान सामने आया कि संबंधित एप को न तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से लोन देने की अनुमति थी और न ही वे किसी पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) से जुड़े थे।

लोन नहीं, पहले डेटा पर नजर

पुलिस के अनुसार, कई एप में सिबिल स्कोर की जरूरत नहीं होने, कम दस्तावेज में लोन मिलने और कुछ ही मिनट में खाते में राशि पहुंचने का दावा किया जाता है। आवेदन के दौरान लोगों से मोबाइल की कई अनुमतियां मांगी जाती हैं। अनुमति मिलते ही एप कॉन्टैक्ट, गैलरी, लोकेशन और एसएमएस समेत अन्य निजी डेटा तक पहुंच बना लेते हैं।

24 शिकायतों की जांच में खुलासा

जांच में पता चला कि कई मामलों में आवेदक के खाते में लोन की राशि पहुंचने से पहले ही संचालक मोबाइल का डेटा हासिल कर लेते हैं। इसके बाद आवेदक के संपर्क सूची में मौजूद लोगों की जानकारी भी उनके पास पहुंच जाती है। कुछ मामलों में इसी डेटा का इस्तेमाल दबाव बनाने और रकम वसूलने के लिए किए जाने की शिकायत मिली है। पुलिस के अनुसार, फर्जी एप के जरिए पहले कम राशि का लोन देने या लोन स्वीकृत होने का संदेश भेजने का भरोसा दिलाया जाता है। इसके बाद प्रोसेसिंग शुल्क, फाइल चार्ज, जीएसटी या अन्य मद में रकम मांगी जाती है। रकम जमा करने के बाद भी लोन नहीं मिलता और नए-नए शुल्क की मांग शुरू हो जाती है।

एनबीएफसी क्या है

साइबर पुलिस को मिली 24 शिकायतों में लोन एप के नाम पर ठगी और डेटा चोरी से जुड़े आरोपों की जांच की गई। तकनीकी जांच के दौरान कई एप के पीछे किसी वैध वित्तीय संस्था का पंजीकरण नहीं मिला। पुलिस ने लोगों को ऐसे एप से सावधान रहने की सलाह दी है, जो बिना सिबिल जांच के तत्काल लोन देने का दावा करते हैं। लोन देने वाली संस्था का आरबीआई से पंजीकरण और संबंधित एनबीएफसी से उसका जुड़ाव जांचना चाहिए। लोन के नाम पर अगर कोई एप कॉन्टैक्ट, गैलरी, एसएमएस और लोकेशन जैसी अनावश्यक अनुमतियां मांगता है तो सावधान हो जाएं। जरूरत नहीं होने पर ऐसी अनुमति नहीं देनी चाहिए।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) ऐसी वित्तीय संस्था है, जो बैंक नहीं होने के बावजूद आरबीआई के नियमों के तहत कई तरह की वित्तीय गतिविधियां करती है। किसी एनबीएफसी के नाम का इस्तेमाल कर लोन ऐप चलाने का दावा करने वाली संस्था की वैधता की जांच जरूरी है।

सामान्य प्रश्न

जमशेदपुर साइबर पुलिस ने किन एप्स के बारे में जांच की?
जमशेदपुर साइबर पुलिस ने बिना सिबिल स्कोर जांचे लोन देने का दावा करने वाले फर्जी मोबाइल एप्स के बारे में जांच की।
Hindustan | Bureau

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