साइबर ठगों ने 15 हजार में रखा था कुक, रोज बनवाते थे चिकन-मटन
हल्द्वानी में पुलिस ने एक साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो चिकन-मटन का शौकीन था। गिरोह ने देशभर में साइबर ठगी कर पांच करोड़ रुपये की काली कमाई की थी। ठगों ने अपने ठिकाने में एक कुक भी रखा था और पूरी गोपनीयता से काम कर रहे थे। छह आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।

संतोष जोशी, हल्द्वानी। हल्द्वानी में पकड़ा गए साइबर गिरोह का नेटवर्क चिकन-मटन का शौकीन निकला। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि देशभर के लोगों से साइबर ठगी करने वाले आरोपी ऐशो-आराम से जिंदगी जीते थे। रोजाना चिकन या मटन बनवाते थे। उन्होंने अपने कमरे में 15 हजार की सैलरी पर एक कुक भी रखा था। दिनभर महंगी चीजें खाते थे।
साइबर गैंग की जांच
हल्द्वानी में पकड़े गए अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से पूछताछ में नए खुलासे हुए हैं। साइबर सेल विशेषज्ञ बीएल कुशवाहा ने बताय कि दो दिन पहले मुखानी क्षेत्र में किराये के कमरे से पुलिस के हत्थे चढ़े इस शातिर सिंडिकेट के सदस्य देशभर के लोगों को निवेश और तीन प्रतिशत कमीशन का झांसा देकर करीब पांच करोड़ की काली कमाई 90 दिनों में कर चुका था। छह आरोपी पुलिस ने गिरफ्तार किए जबकि दो नाबालिगों को सरंक्षण में लिया था। पुलिस रिमांड और पूछताछ में सामने आया है कि इस हाई-प्रोफाइल रैकेट का जाल पूरे उत्तराखंड सहित कुमाऊं और गढ़वाल मंडल तक फैला हुआ था। ठगों के गुर्गे रोजाना 20 से 30 नए बैंक खाते किराए पर जुटाने का टारगेट लेकर चलते थे। इसी के जरिए किराए के खातों में अवैध रकम ट्रांसफर कराई जाती थी, जिसके तार देश के 10 से 11 राज्यों से जुड़े पाए गए हैं।
गिरोह की विशेषताएँ
फोन पर नहीं करते हैं बात
गिरोह के सदस्यों ने पुलिस से बचने और अपनी गतिविधियों को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए बेहद सख्त इंतजाम किए हुए थे। ठिकाने के भीतर सामान्य मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध था और आपस में बातचीत के लिए केवल व्हाट्सएप का ही इस्तेमाल किया जाता था।
गिरोह की कार्यप्रणाली
300 से ज्यादा लोगों को करते थे कॉल
साइबर सेल की जांच में सामने आया है कि एक दिन में ये ठग 300 से अधिक लोगों को कॉल करते थे। जिसमें से चार पांच इनके झांसे में आ ही जाते थे। इसी तरह फील्ड में जाकर भी लोगों को कमीशन का लालच देकर फंसाते थे।
पुलिस का बयान
कोट:
साइबर सेल नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। करोड़ों की काली कमाई करने वाले ये ठग ऐशो आराम की जिंदगी जीते हैं। इनके साथ जुड़े नेटवर्क भी तलाश किए जा रहे हैं।
डॉ.मंजूनाथ टीसी, एसएसपी


