बलियापुर से जारी 57 मोबाइल सिम से देश में हुई करोड़ों की ठगी
बलियापुर में मोबाइल कॉर्नर दुकान से 57 सिम के जरिए करोड़ों की साइबर ठगी का खुलासा हुआ। दुकान मालिक और उसके स्टाफ ने आम जनता को ठगने के लिए सिम कार्ड बेचे। पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार कर मामला दर्ज किया, जिसमें 166 सिम का जिक्र है। गिरोह ने फर्जी बैंक खातों के माध्यम से ठगी की।

बलियापुर चौक बजरंग बली मंदिर के पीछे स्थित मोबाइल कॉर्नर नामक दुकान से जारी 57 मोबाइल सिम से देशभर में करोड़ों रुपए की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है। दुकान मालिक ने अपने दो स्टाफ की मदद से सिम कार्ड बेचे। इन मोबाइल सिम को साइबर ठगों ने आमलोगों को जाल में फंसाने और फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) खोल कर ठगी का पैसा मंगाने में किया गया। मामले में बलियापुर पुलिस ने छह लोगों को पकड़ कर शनिवार को जेल भेजा। बलियापुर थाना में 17 नामजद सहित अन्य अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए इस बड़े अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि यह गिरोह सीधे-साधे और गरीब ग्रामीणों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके आधार कार्ड व अन्य दस्तावेजों के जरिए फर्जी तरीके से मोबाइल सिम कार्ड एक्टिवेट कराता था। बिहार के पटना दूरसंचार विभाग के अपर महानिदेशक की ओर से मिले पत्र में बताया गया था कि बलियापुर के मोबाइल कॉर्नर दुकान से 166 मोबाइल सिम जारी किए गए हैं। एक ही व्यक्ति के नाम पर कई-कई सिम जारी किए गए हैं। यह साइबर अपराध का कृत हो सकता है।
जांच प्रक्रिया
जांच में पता चला कि इनमें से 57 मोबाइल सिम के खिलाफ नेशनल साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल में साइबर ठगी की शिकायत दर्ज है। इसके बाद बलियापुर पुलिस सक्रिय हुई और दुकान के मालिक बलियापुर निवासी काजू दे उर्फ प्रीतम दे और उसके दो स्टाफ गौरव कुमार गुप्ता उर्फ गोलू और ओडिशा बड़बिल क्योंझर निवासी सोनू स्वर्णकार उर्फ सोनू दास को दबोचा। तीनों ने गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
सिम वितरण के तरीके
ग्रामीण एसपी ने बताया कि दुकानदार काजू दे से हुई पूछताछ में उसने बताया कि इसी वर्ष जनवरी महीने में कालूबथान शीतलपुर सालुकचपड़ा का गोविंद बाउरी, गोविंद का दोस्त पूर्वी टुंडी दुमा निवासी चिरंजीत कुमार दे और कालूबथान अंकद्वार निवासी मंटू दे ने बोला कि हमलोग कुछ लोगों के नाम से सिम लेंगे, जिसका उपयोग साइबर ठगी में किया जाएगा तथा इसके बदले हर सिम पर 500-500 रुपए अतिरिक्त भुगतान करेंगे।
सिम खरीदने की गतिविधियाँ
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने एक जनवरी से 29 मई के बीच अतिरिक्त पैसा देकर एक-एक व्यक्ति के नाम पर 10 से 20 सिम तक खरीदे। मुख्य रूप से सालूकचपड़ा के मधु बाउरी की पत्नी चंदना बाउरी के नाम से 20 सिम, गौरव गुप्ता के नाम से 14 सिम, बजरंग बाउरी के नाम से 13 सिम, जितेन बाउरी के नाम से 12 सिम, बादल गोप के नाम से 10 सिम और राजेश बाउरी के नाम से 10 सिम खरीदे। गौरव और सोनू ने बताया कि इन लोगों ने अपने नाम पर सिम लेने के लिए 12 सौ रुपए लिए थे।
ठगी की संरचना
पुलिस पूछताछ में गौरव ने बताया कि हमलोग संगठित रूप से साइबर अपराध के लिए तीन लेयर में काम करते थे। काजू, गौरव व सोनू सिम जारी कराते थे। गोविंद और मधुसूदन का काम लोगों को पैसे का लालच देकर अपने-अपने नाम से सिम खरीदने के लिए तैयार करना था। गोविंद सभी लोगों को लेकर काजू की दुकान पर आता था और सिम निकलवा कर चिरंजीत और मंटू को देता था। सिम लेने वालों में हबा बाउरी और रुस्तम अंसारी के भी नाम शामिल हैं। सोनू को चिरंजीत ने बताया था कि गिरोह में कृष्णा दास, शंकर दां और प्रदीप आदि भी सक्रिय हैं।
ठगी का राशी
ग्रामीण एसपी ने बताया कि शुरुआती जांच में सिर्फ छह सिम से 60 लाख रुपए की ठगी के प्रमाण मिले हैं। कविता मंडल नामक महिला से इस गिरोह ने साढ़े आठ हजार रुपए और उत्तम बर्मण नाम व्यक्ति से 25 हजार रुपए ठगी का सत्यापन हुआ है। बाकी 51 मोबाइल सिम से भी ठगी के आंकड़ों की जांच हो रही है। आरोपियों के पास से पुलिस ने कई दस्तावेज जब्त किए हैं।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने पूर्वी टुंडी मयरानवाटांड़ के कृष्णा कुमार दास, दुमा नवाटांड़ के चिरंजीत कुमार, शीतलपुर के मधुसूदन बाउरी, सिंदरी रोड निवासी गौरव कुमार गुप्ता और काजू दे को पकड़ कर जेल भेजा। छापेमारी टीम में सिंदरी सर्किल इंस्पेक्टर नूतन मोदी के अलावा बलियापुर थाना प्रभारी सत्यजीत कुमार, एसआई शेखर कुमार, मेथ्यू एक्का, पूर्वी टुंडी थाना प्रभारी नीतीश कुमार, अशोक कुमार, हसरत जमाल, महेश्वर महतो, अनिल कुमार और रोहित कुमार आदि शामिल थे।


