मासूम बच्चों से फर्जी गेम्स में किस्तें भरवा रहे साइबर ठग
सोशल मीडिया के दौर में, साइबर अपराधी अब बच्चों को निशाना बना रहे हैं। 8 से 10 साल के बच्चे अनजाने में ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं। साइबर सेल ने अब तक 53 शिकायतें प्राप्त की हैं। जागरूकता ही साइबर अपराध को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है।

हल्द्वानी। सोशल मीडिया के दौर में साइबर अपराधियों ने अब मासूम बच्चों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पढ़ाई और मनोरंजन के नाम पर मोबाइल इस्तेमाल कर रहे 8 से 10 साल के स्कूली बच्चे अनजाने में ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड का शिकार बन रहे हैं। पेड गेम ज्वॉइन कराने के बाद किस्तों में पैसे वसूल रहे हैं। जिसे कारण अभिभावकों को चपत लग रही है। कुमाऊं के साइबर विशेषज्ञ एसआई बीएल कुशवाहा ने बताया कि साइबर सेल में हर दिन ऐसे 4 से 5 मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें गेमिंग के नाम पर परिजनों के बैंक खातों से 500 रुपये से लेकर 20 हजार रुपये तक की रकम उड़ाई जा चुकी है। ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक) पर लुभावने फर्जी गेम्स के विज्ञापन चलाते हैं। जैसे ही बच्चे इन विज्ञापनों पर क्लिक करते हैं, उन्हें गेम में आगे बढ़ने, नए लेवल अनलॉक करने, आकर्षक स्किन्स, वेपन्स और कॉइन्स खरीदने का लालच दिया जाता है। बच्चों को किस्तों में छोटे-छोटे भुगतान करने के लिए उकसाया जाता है।
बैंक जानकारी मिलते ही खाता खाली
मासूम बच्चे बिना सोचे-समझे परिजनों के मोबाइल से बैंक विवरण (कार्ड डिटेल्स या यूपीआई पिन) दर्ज कर देते हैं। एक बार जानकारी मिलते ही साइबर ठग खातों में जमा रकम साफ कर देते हैं। कुमाऊं में अब तक ऐसे 53 अभिभावकों ने साइबर सेल को इस साल शिकायत कर दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई बच्चे महीनों से इन ठगों के संपर्क में थे, लेकिन परिजनों को इसका पता तब चला जब खाते से लगातार पैसे कटने के मैसेज आए。
केस 1:
मुखानी निवासी एक महिला बीते दिन साइबर सेल हल्द्वानी पहुंची। उसने बताया कि महीनों से उसका आठ साल का बेटा पेड गेम खेल रहा है। लगातार किस्तों में 10 हजार की ठगी हो गई। लेवल पार करने के लिए उकसाया जाता रहा।
केस 2:
बैलपड़ाव निवासी एक व्यक्ति भी साइबर सेल हल्द्वानी पहुंचे। कहा कि उनका 10 साल का बेटा पब्जी गेम खेलता है। एक लिंक से उसने खाते की जानकारी शेयर कर दी। अब गेम से लगातार पैसे कट रहे हैं। अब तक 23 हजार जा चुके हैं।
कोट:
साइबर अपराध को रोकने के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। बच्चों को अनावश्यक फोन न दें और उनकी निगरानी करते रहें। लगातार साइबर अपराध चुनौती बन रहा है। हमें इसे जागरूकता से ही हराना होगा।
नीलेश आनंद भरणे, आईजी साइबर


