चीन-दक्षिण एशिया युवा दूत कार्यक्रम में चमके सीयूजे के छात्र
केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के तीन विद्यार्थियों ने चीन के युन्नान विश्वविद्यालय में आयोजित चीन-दक्षिण एशिया युवा दूत कार्यक्रम में भाग लेकर विश्वविद्यालय और देश का गौरव बढ़ाया। अन्य चार विद्यार्थियों का भी चीन में अध्ययन के लिए चयन हुआ है। विद्यार्थियों ने चीन की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं पर ज्ञान हासिल किया।

रांची, विशेष संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के सुदूर पूर्व भाषा विभाग (चीनी भाषा) के तीन विद्यार्थियों ने चीन के युन्नान विश्वविद्यालय में आयोजित चीन-दक्षिण एशिया युवा दूत कार्यक्रम में भाग लेकर विश्वविद्यालय और देश का गौरव बढ़ाया। इनमें आयुष कुमार सुमन, आकृति गौतम व कुमारी स्नेहा शामिल थी। इसके अलावा विश्वविद्यालय के चार अन्य विद्यार्थियों शांतनु, अंशु, खुशी व पूर्णिमा का चयन भी चीन में एक वर्षीय पूर्णकालिक अध्ययन के लिए हुआ है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने चीन की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक चाय संस्कृति, एआई, सांस्कृतिक आदान-प्रदान व युवा नेतृत्व जैसे अहम विषयों पर हुए सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया। इनके माध्यम से उन्हें विभिन्न देशों के युवाओं के साथ विचार साझा करने, नई तकनीकों को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक गतिविधियाँ
शैक्षणिक गतिविधियों के साथ विद्यार्थियों ने युन्नान प्रांतीय संग्रहालय, यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल जिंगमाई पर्वत व प्राचीन चाय वनों का भी भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने चीन के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक विरासत को नजदीक से देखा और वहां की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जानकारी हासिल की। विद्यार्थियों ने इसे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण और यादगार अनुभव बताया।
कुलपति का बयान
इस उपलब्धि पर झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सारंग मेढ़कर ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, वैश्विक समझ व नेतृत्व क्षमता को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अवसर विद्यार्थियों को दुनिया के विभिन्न देशों की संस्कृति, शिक्षा और शोध से जुड़ने का मंच प्रदान करते हैं और वे भविष्य में भी विश्वविद्यालय और देश का नाम रोशन करेंगे। वहीं, सीयूजे के विदेशी भाषा विभाग के प्रो संदीप बिस्वास, डॉ अर्पणा राज, सुशांत और पवन ने भी विद्यार्थियों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह विभाग और विश्वविद्यालय दोनों के लिए गर्व की बात है।


