विभाजन में भौगोलिक जनसंख्या नहीं राजनीति आधार बनी
कानपुर में सीएसजेएमयू के स्कूल ऑफ आर्ट्स और सोशल साइंसेस ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। वक्ताओं ने विभाजन की राजनीतिक और मानवता पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की। प्रो. अनिल कुमार मिश्रा ने विभाजन के सामाजिक संबंधों और विस्थापन की पीड़ा पर विस्तार से बात की।

कानपुर। सीएसजेएमयू के स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शुक्रवार को विशेष अकादमिक व्याख्यान का आयोजन किया। अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज के सहायक आचार्य मोहित अवस्थी ने विभाजन की प्रक्रिया में जनसंख्या के भौगोलिक वितरण के स्थान पर राजनीति को आधार बनाया गया। उन्होंने रेडक्लिफ सीमा-निर्धारण की प्रशासनिक चुनौतियों और उसके मानवीय प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महज छह सप्ताह में तैयार किए गए सीमा-निर्धारण के निर्णय में कई समस्याएं आईं। सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पक्षों की जटिलताओं को पर्याप्त रूप से समाहित करना कठिन रहा। विभाजन की प्रशासनिक प्रक्रिया की कमियों की मानवीय कीमत सामान्य नागरिकों को चुकानी पड़ी।मुख्य
वक्ता प्रो. अनिल कुमार मिश्रा ने विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके सामाजिक एवं मानवीय प्रभावों तथा विस्थापन की पीड़ा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभाजन से लाखों लोगों का जीवन, परिवार, सामाजिक संबंध और सांस्कृतिक स्मृतियां प्रभावित हुईं। स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के निदेशक डॉ. अमित कुमार, सहायक आचार्य डॉ. अर्जव जैन ने भी विचार रखे। मंच का संचालन सहायक आचार्य अंजली सचान ने किया। डॉ. उर्वशी ने धन्यवाद दिया। डॉ. मानस उपाध्याय, डॉ. प्रशांत, डॉ. अभिषेक मिश्र, डॉ. अजय, डॉ. अनमोल शेखर आदि मौजूद थे।


