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विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा गंभीर स्थित : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान निजी और सार्वजनिक संपत्तियों की तोड़फोड़ की घटनाओं को गंभीर करार दिया है। साथ ही अदालत ने कहा कि वह कानून में संशोधन के लिए सरकार का इंतजार नहीं करेगी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा कि इस मामले में निर्देश जारी किए जाएंगे। अदालत ने अटार्नी जनरल से इस बारे में सुझाव देने को कहा है। 

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि इस तरह की तोड़फोड़ और दंगे की घटनाओं के मामले में क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक जैसे प्राधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के किसी न किसी हिस्से में लगभग हर सप्ताह ही हिंसक विरोध प्रदर्शन और दंगे की घटनाएं हो रही हैं।

वेणुगोपाल ने महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के लिए विरोध प्रदर्शन, एससी/एसटी एक्ट मामले में शीर्ष अदालत के फैसले के बाद देशभर में हुई हिंसा और अब हाल ही में कांवड़ियों की कथित संलिप्तता वाली हिंसक घटनाओं का उल्लेख किया। अटार्नी जनरल ने कहा कि फिल्म पद्मावत जब प्रदर्शित होने वाली थी, तो एक समूह ने खुलेआम प्रमुख अभिनेत्री की नाक काटने की धमकी दे डाली, लेकिन कहीं कुछ नहीं हुआ। कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। इस पर पीठ ने वेणुगोपाल से कहा,आपका क्या सुझाव है।

अटार्नी जनरल ने कहा कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में ही अनधिकृत निर्माण उस वक्त रुक गए थे जब यह फैसला लिया गया था कि इस तरह के निर्माण के लिए संबंधित क्षेत्र के डीडीए के अधिकारियों की जवाबदेही होगी। इस मामले में वीडियो रिकॉर्डिंग करने से स्थिति और अच्छी हुई है। 

वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए कानून में संशोधन करने पर विचार कर रही है। अदालतों को उसे उपयुक्त कानून में बदलाव की अनुमति देनी चाहिए।

इस पर, पीठ ने टिप्पणी की, हम संशोधन का इंतजार नहीं करेंगे। यह गंभीर स्थिति है और यह रुकनी चाहिए। पीठ ने इसके बाद याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा कि वह इस पर विस्तृत आदेश सुनाएगी। याचिका में शीर्ष अदालत के 2009 के फैसले में दिए गए निर्देशों को लागू कराने का आग्रह किया गया है।

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  • Web Title:Critical violence during protests Supreme Court