उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान जरूरी
उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान जरूरी सीएचसी सुरसंड में एएनएम का क्षमतावर्द्धन कार्यशाला, एचआरपी की पहचान व नियमित फॉलोअप पर दिया जो

उच्च जोखिम वाली गर्भती महिलाओं की समय पर पहचान जरूरी
सीतामढ़ी। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं से बचाव के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सुरसंड में मंगलवार को एएनएम के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण एवं क्षमतावर्द्धन कार्यशाला आयोजित की गई। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. लालू कुमार की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में विभिन्न स्वास्थ्य उपकेंद्रों से आईं 25 आउटरीच एएनएम ने भाग लिया।
कार्यशाला में प्रमुख विषय
कार्यशाला में पिरामल फाउंडेशन के कार्यक्रम प्रमुख दुर्गा प्रसाद सिंह एवं गांधी फेलो रोशन कुमार गिरि ने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान, समय पर रेफरल और नियमित फॉलोअप को लेकर एएनएम को तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी दी।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
प्रशिक्षण के दौरान एएनएम को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के प्रमुख संकेतों की पहचान के बारे में बताया गया। इसमें गंभीर रक्ताल्पता, उच्च रक्तचाप, गर्भावधि मधुमेह, कम या अधिक उम्र में गर्भावस्था तथा पूर्व में जटिल प्रसव या सिजेरियन प्रसव जैसी स्थितियों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। ऐसी गर्भवती महिलाओं को समय रहते उच्च स्वास्थ्य केंद्र में रेफर करने और उनकी लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
डॉ. लालू कुमार का योगदान
डॉ. लालू कुमार ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में सामुदायिक स्तर पर तैनात एएनएम की भूमिका महत्वपूर्ण है। गांव स्तर पर ही उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान होने से कई जटिलताओं को टाला जा सकता है। उन्होंने एएनएम से अपने क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी और उचित परामर्श सुनिश्चित करने की अपील की। कार्यशाला में प्रसव पूर्व जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को पोषण, संस्थागत प्रसव और आपातकालीन तैयारी के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। गृह भ्रमण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को जोखिम वाली महिलाओं की स्थिति पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया गया। प्रखंड अस्पताल प्रबंधक मोहम्मद सदरुद्दीन और प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक कृष्णनंदन कुमार ने एएनएम को अपने-अपने क्षेत्र की सभी गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित करने तथा एचआरपी पोर्टल पर आंकड़ों की प्रविष्टि समय पर पूरा करने का निर्देश दिया। कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्र स्तर पर उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर समय पर उपचार और रेफरल की व्यवस्था को मजबूत करना रहा।


